रविवार, 9 अगस्त 2026

षड्बल के छः मुख्य बल

षड्बल के छः मुख्य बलों के अंतर्गत आने वाले सभी उपबलों के नाम इस प्रकार हैं। 
पाराशरी परंपरा में विशेष रूप से स्थान बल के 5 और काल बल के 9 अंग माने जाते हैं। 

१. स्थान बल — ५ उपबल

उच्च बल — Uccha Bala
सप्तवर्गज बल — Saptavargaja Bala
ओज-युग्म राशि-अंश बल — Ojha-Yugma Bala
केन्द्रादि बल — Kendradi Bala
द्रेष्काण बल — Drekkana Bala

२. दिग्बल — कोई पृथक उपबल नहीं
दिग्बल स्वयं एक स्वतंत्र बल है। ग्रह की दिशात्मक स्थिति के अनुसार इसकी गणना होती है।

३. काल बल — ९ उपबल
पाराशरी षड्बल-गणना में कालबल के अंतर्गत ये अंग आते हैं—
नाथोन्नत बल — Natonnata Bala
पक्ष बल — Paksha Bala
त्रिभाग बल — Tribhaga Bala
वर्ष बल — Varsha/Abda Bala
मास बल — Masa Bala
वार बल — Vara/Dina Bala
होरा बल — Hora Bala
अयन बल — Ayana Bala
युद्ध बल — Yuddha Bala
ध्यान दें कि वर्ष–मास–वार–होरा को कई ग्रंथ/सॉफ्टवेयर एक संयुक्त खंड Abda-Masa-Dina-Hora Bala के रूप में भी प्रदर्शित करते हैं; इसलिए अलग-अलग पुस्तकों में उपबलों की सूची 6, 8 या 9 शीर्षकों में दिखाई दे सकती है। पाराशरी गणना में युद्धबल को कालबल के योग में शामिल किया जाता है। 

४. चेष्टा बल — कोई पृथक उपबल नहीं
चेष्टा बल ग्रह की गति, वक्रीत्व तथा गति की अवस्था के आधार पर निर्धारित होता है।

५. नैसर्गिक बल — कोई पृथक उपबल नहीं
नैसर्गिक बल ग्रह की स्वाभाविक शक्ति है। सात ग्रहों के लिए इसका स्थिर मान निर्धारित है।

६. दृग्बल — कोई पृथक उपबल नहीं
दृग्बल अन्य ग्रहों से प्राप्त शुभ अथवा अशुभ दृष्टि के आधार पर निर्धारित होता है।

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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