ज्योतिषजन्म लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ज्योतिषजन्म लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 19 जनवरी 2026

जन्मकुंडली का छठा भाव और षष्ठेश ग्रह की महादशा

Vedic Astro Care
जन्म कुंडली में षष्ठेश और स्वास्थ्य पर उसका प्रभाव

भूमिका 

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली का छठा भाव रोगों का भाव माना गया है। इसके अधिपति ग्रह को षष्ठेश कहा जाता है।
यदि किसी जातक पर षष्ठेश की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो, तो वह व्यक्ति रोगों से प्रभावित हो सकता है। जन्मपत्रिका में षष्ठेश को रोग का मुख्य कारक ग्रह माना जाता है।
षष्ठेश की महादशा और रोग
यदि जन्मपत्रिका के अनुसार किसी जातक पर षष्ठेश की महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो रोगग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है।
यदि षष्ठेश जन्मपत्रिका के शुभ या लाभ भाव में स्थित है, तो रोग की संभावना और भी बढ़ जाती है। ऐसे जातक शीघ्र रोगमुक्त नहीं हो पाते।
जन्मकुंडली में लग्न और षष्ठ भाव
जन्मकुंडली का प्रथम भाव लग्न कहलाता है।
इसमें एक से बारह तक की संख्या लिखी होती है, जो राशि का निर्धारण करती है:
संख्या
लग्न राशि
1
मेष
2
वृष
3
मिथुन
4
कर्क
5
सिंह
6
कन्या
7
तुला
8
वृश्चिक
9
धनु
10
मकर
11
कुंभ
12
मीन
जन्मकुंडली में षष्ठ भाव रोग का भाव होता है।
इस भाव का स्वामी ग्रह यानी षष्ठेश रोग का प्रमुख कारक माना जाता है।
कभी-कभी षष्ठेश, व्ययेश या अष्टमेश की दशा-अंतर दशा भी मारक प्रभाव डालती है।
लग्न अनुसार मारकेश और षष्ठेश ग्रह
अगला चरण है यह जानना कि आपके लग्न अनुसार कौन सा ग्रह षष्ठेश (रोग कारक) है और कौन सा मारकेश (मारक ग्रह) है।
लग्न
मारकेश ग्रह
षष्ठेश ग्रह
मेष
शुक्र, मंगल
बुध
वृषभ
बुध, मंगल
शुक्र
मिथुन
चंद्र, गुरु
मंगल
कर्क
सूर्य, शनि
गुरु
सिंह
बुध, शनि
शनि
कन्या
शुक्र, गुरु
शनि
तुला
मंगल
गुरु
वृश्चिक
गुरु, शुक्र
मंगल
धनु
शनि, बुध
शुक्र
मकर
शनि, चंद्र
बुध
कुंभ
गुरु, सूर्य
चंद्र
मीन
मंगल, बुध
सूर्य
ध्यान दें: अक्सर देखा जाता है कि रोग प्रायः षष्ठेश ग्रह से संबंधित ही प्रतीत होते हैं।
निष्कर्ष
जन्म कुंडली में षष्ठेश ग्रह का अध्ययन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
किसी भी ग्रह की महादशा, अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में यदि षष्ठेश सक्रिय हो, तो स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना आवश्यक है।
व्यक्तिगत और सशुल्क कुंडली विश्लेषण करवा कर ग्रह योगों का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करता है।
नमस्कार 🙏

रविवार, 18 जनवरी 2026

मेष से मीन तक: चन्द्र राशि के अनुसार व्यक्तित्व का रहस्य

Vedic Astro Care

वैदिक ज्योतिष अनुसार चन्द्र राशि और जातक का स्वरूप व स्वभाव

वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक स्वागत है
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु—ये कुल नौ ग्रह माने गए हैं। वहीं मेष से मीन तक बारह राशियाँ राशिचक्र का निर्माण करती हैं।
जातक के जन्म समय में चन्द्रमा जिस राशि में स्थित होता है, वही उसकी चन्द्र राशि कहलाती है। चन्द्र राशि का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह व्यक्ति के मन, स्वभाव, भावनाओं और मानसिक प्रवृत्तियों को दर्शाती है।
आप अपनी चन्द्र राशि को जन्म कुंडली के जन्मांग चक्र में देखकर आसानी से जान सकते हैं। जिस भाव में चन्द्र (चं) लिखा हो, उस भाव में अंकित संख्या के अनुसार आपकी चन्द्र राशि निश्चित होती है—
1 – मेष | 2 – वृष | 3 – मिथुन | 4 – कर्क | 5 – सिंह |
6 – कन्या | 7 – तुला | 8 – वृश्चिक | 9 – धनु |
10 – मकर | 11 – कुम्भ | 12 – मीन
आज इस ब्लॉग में हम मेष से मीन तक सभी बारह राशियों के जातकों के स्वरूप और स्वभाव का संक्षिप्त वर्णन प्रस्तुत कर रहे हैं।
🔴 मेष राशि (Aries)
मेष राशि में चन्द्रमा होने पर जातक चंचल नेत्रों वाला, साहसी, दानी, धर्म और धन का संतुलन रखने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति परिश्रमी, राजसम्मान प्राप्त करने वाले, कठोर परंतु अंततः विनम्र स्वभाव के होते हैं। जल से भय तथा शीघ्र रोगग्रस्त होना इनके स्वभाव में देखा जाता है।
🟢 वृष राशि (Taurus)
वृष राशि के जातक भोगप्रिय, धनवान, दानी, तेजस्वी और बलवान होते हैं। ये विलासिता पसंद करते हैं, स्वच्छता प्रिय होते हैं और मित्रों के प्रति अत्यंत विश्वसनीय होते हैं।
🟡 मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि में जन्मे व्यक्ति मृदुभाषी, बुद्धिमान, न्यायप्रिय और संवाद में निपुण होते हैं। संगीत, कला और ज्ञान में रुचि रखते हैं। ये चंचल दृष्टि वाले, कर्मठ और यशस्वी होते हैं।
⚪ कर्क राशि (Cancer)
कर्क राशि के जातक अत्यंत बुद्धिमान, भावुक, धार्मिक और गुरु भक्त होते हैं। ये परिश्रमी होते हैं परंतु मानसिक अस्थिरता, क्रोध और प्रवास की प्रवृत्ति भी देखी जाती है।
🦁 सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के जातक आत्मविश्वासी, क्षमाशील, प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले होते हैं। माता-पिता के प्रिय, शीघ्र क्रोधी, विलासिता एवं व्यसनों की ओर झुकाव रखने वाले होते हैं।
🌿 कन्या राशि (Virgo)
कन्या राशि में जन्मा व्यक्ति कुशल, दानी, विद्वान और वैदिक मार्ग का अनुयायी होता है। कला, नाटक, संगीत में रुचि होती है। हालांकि स्त्री पक्ष से कष्ट और प्रवास योग भी पाए जाते हैं।
⚖️ तुला राशि (Libra)
तुला राशि के जातक मधुरभाषी, दयालु, व्यापार कुशल और देव उपासक होते हैं। धन में उतार-चढ़ाव रहता है तथा ये मित्रों के प्रिय होते हैं। प्रायः परदेश में निवास करते हैं।
🦂 वृश्चिक राशि (Scorpio)
वृश्चिक राशि के जातक साहसी, तीव्र स्वभाव वाले, पराक्रमी और गोपनीय प्रकृति के होते हैं। कभी-कभी क्रूरता, धूर्तता और पारिवारिक संबंधों में कठोरता देखी जाती है।
🏹 धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के व्यक्ति सत्यप्रिय, सात्त्विक, तेजस्वी और विद्वान होते हैं। शिल्प, विज्ञान और ज्ञान में रुचि रखते हैं। ये प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं।
🐐 मकर राशि (Capricorn)
मकर राशि के जातक परिश्रमी, विद्वान, धनी और त्यागी होते हैं। संगीत प्रेमी, माता भक्त, सेवाभावी होते हैं, किंतु मानसिक चिंतन अधिक करते हैं।
🌊 कुम्भ राशि (Aquarius)
कुम्भ राशि में जन्मा व्यक्ति दानी, कृतज्ञ, निर्भीक और स्वतंत्र विचारों वाला होता है। ये अपने परिश्रम से धन अर्जित करते हैं तथा समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं।
🐟 मीन राशि (Pisces)
मीन राशि के जातक गंभीर, ज्ञानी, कला-कुशल और आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। ये भाई-बन्धुओं से प्रेम करने वाले, सेवा भावी और शुभ दृष्टि वाले होते हैं।
✨ निष्कर्ष
चन्द्र राशि व्यक्ति के मानसिक स्वरूप और स्वभाव को समझने का सशक्त माध्यम है। हालांकि संपूर्ण जीवन फलादेश के लिए पूरी जन्म कुंडली का विश्लेषण आवश्यक होता है।
📞 जन्मकुंडली के विस्तृत विश्लेषण हेतु
वैदिक ऐस्ट्रो केयर से संपर्क करें।
👉 हमारे यूट्यूब चैनल वैदिक ऐस्ट्रो केयर को सब्सक्राइब करें और ज्योतिष से जुड़ी नवीन जानकारियाँ प्राप्त करें।
आपके मंगलमय जीवन की कामना के साथ
🙏 वैदिक ऐस्ट्रो केयर 🙏
नमस्कार