बुधवार, 21 जनवरी 2026

पिशाच योग क्या है? शनि और राहु के दुष्प्रभाव व वैदिक उपाय

🔱 वैदिक ज्योतिष में पिशाच योग: शनि–राहु युति से बनने वाला अशुभ योग और उसके प्रभाव


नमस्कार। 
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वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि और राहु को पाप ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। जब किसी जातक की जन्मकुंडली में ये दोनों ग्रह आपस में किसी भी प्रकार का संबंध बनाते हैं, तो एक अत्यंत अशुभ योग का निर्माण होता है, जिसे वैदिक ज्योतिष में “पिशाच योग” कहा गया है।
शनि और राहु दोनों ही रात्रि बली ग्रह हैं।
शनि का वर्ण श्याम है और यह अंधकार, भय व कष्ट का कारक ग्रह है
राहु एक मायावी, भ्रम उत्पन्न करने वाला छाया ग्रह है
जब इन दोनों ग्रहों का आपसी संबंध बनता है, तो एक प्रकार की नकारात्मक शक्ति का सृजन होता है, जिसे ही पिशाच योग कहा जाता है।
आज हम इस लेख में पिशाच योग, उसके प्रकार, भाव अनुसार प्रभाव और उसके वैदिक उपायों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
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🪐 जन्मकुंडली में पिशाच योग कैसे बनता है?
जन्मकुंडली में पिशाच योग चार प्रकार से बनता है:
जब शनि और राहु किसी भी भाव में एक साथ युति करें
जब शनि और राहु एक-दूसरे को परस्पर देखें
जब शनि की राहु पर या राहु की शनि पर दृष्टि हो
जब गोचर के दौरान शनि जन्म के राहु पर या राहु जन्म के शनि पर से गोचर करे
इन चारों स्थितियों में शनि–राहु के बीच संबंध बनते ही पिशाच योग का निर्माण होता है।
🏠 भाव अनुसार पिशाच योग के प्रभाव
1️⃣ लग्न भाव
लग्न में शनि–राहु की युति होने पर व्यक्ति पर तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव अधिक रहता है।
ऐसे जातक सदैव चिंतित रहते हैं, नकारात्मक विचारों से घिरे रहते हैं और कोई न कोई रोग बना रहता है।
2️⃣ द्वितीय भाव
इस भाव में पिशाच योग बनने पर व्यक्ति को परिवार से ही विरोध झेलना पड़ता है।
वाणी दोष, धन संचय में कठिनाई, जुआ-सट्टा, नशे की प्रवृत्ति और आर्थिक हानि होती है।
3️⃣ तृतीय भाव
इस भाव में युति होने पर व्यक्ति भ्रमित रहता है।
छोटे भाई को कष्ट या उससे सुख की कमी होती है।
यदि पंचम भाव भी प्रभावित हो, तो संतान सुख में भारी बाधा आती है।
4️⃣ चतुर्थ भाव
यह स्थिति अत्यंत कष्टदायक होती है।
माता, मकान, भूमि और सुख का अभाव रहता है।
घर में नकारात्मक ऊर्जा, वास्तु दोष और निर्माण कार्यों में भारी हानि होती है।
5️⃣ पंचम भाव
इस भाव में पिशाच योग शिक्षा, बुद्धि और संतान को प्रभावित करता है।
संतान को कष्ट, दुर्बलता या संतान सुख का पूर्ण अभाव देखा जाता है।
6️⃣ षष्ठ भाव
छुपे हुए शत्रु, अज्ञात रोग, ऋण, नशे की आदत और दुर्घटनाओं की संभावना रहती है।
हृदय, रक्त विकार और मामा पक्ष से विवाद संभव है।
7️⃣ सप्तम भाव
दाम्पत्य जीवन, साझेदारी और रोजगार में भारी कठिनाइयाँ आती हैं।
मित्रों से धोखा, जीवनसाथी से कलह और रोजगार में बाधाएँ रहती हैं।
8️⃣ अष्टम भाव
वैवाहिक जीवन में तनाव, शल्य चिकित्सा, उदर व मूत्र विकार, आयु संकट और गुप्त संबंधों की संभावना रहती है।
9️⃣ नवम भाव
भाग्य में निरंतर उतार-चढ़ाव, धर्म से विमुखता और पिता को कष्ट रहता है।
कठोर संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है।
🔟 दशम भाव
कारोबार और कर्मक्षेत्र में अस्थिरता रहती है।
उच्च अधिकारियों या सरकार से दंड मिलने की संभावना रहती है।
1️⃣1️⃣ एकादश भाव
लाभ भाव में यह युति गलत साधनों से धन देती है।
भाई-बहन और संतान को कष्ट रहता है।
1️⃣2️⃣ द्वादश भाव
अनैतिक संबंध, गृहस्थ सुख में कमी, धोखा और असाध्य रोग की संभावना रहती है।
🌙 रात्रि बली भाव और पिशाच योग
लग्न से सप्तम तक के भाव रात्रि बली माने गए हैं।
इन भावों में शनि और राहु का संबंध बनना अत्यधिक कष्टदायक होता है।
🕉️ पिशाच योग के वैदिक उपाय
पिशाच योग के दुष्प्रभाव से मुक्ति हेतु शास्त्रोक्त एवं विधिपूर्वक उपाय कराना अत्यंत आवश्यक है। उपाय सदैव योग्य कर्मकांडी ब्राह्मणों द्वारा ही करवाने चाहिए।
🔸 प्रमुख वैदिक उपाय:
दुर्गा सप्तशती का सम्पुटित पाठ एवं दशांश हवन
प्रतिदिन संकटमोचन हनुमानाष्टक का पाठ
शनिवार सायंकाल सुंदरकांड पाठ
शनि एवं राहु जप और हवन
नित्य शनि स्तोत्र पाठ
अमावस्या के दिन सूर्यास्त के समय बहते जल में नारियल प्रवाहित करना
इन उपायों से पिशाच योग के दुष्प्रभावों में निश्चित रूप से कमी आती है।
🔍 निष्कर्ष
जन्मकुंडली में बनने वाला पिशाच योग जीवन में मानसिक, पारिवारिक, आर्थिक और शारीरिक कष्ट उत्पन्न करता है। समय रहते इसका सही विश्लेषण और वैदिक उपाय कराए जाएँ, तो इसके दुष्प्रभावों से मुक्ति संभव है।
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वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन की कामना करता है।
🙏 नमस्कार।

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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