नमस्कार। वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य पुत्र शनि देव को मानव द्वारा किए गए समस्त शुभ अशुभ कर्मों का फल प्रदान करने वाले देवता माना गया है। यानी कि, यह व्यक्तियों को उनके कर्म के अनुसार ही फल प्रदान करते हैं। जातक की कुंडली में यदि शनि शुभ स्थिति में हों तो व्यक्ति के शुभ कर्मों के आधार पर उसे रंक से राजा बना देते हैं, और वहीं यदि जन्म कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हों तो ऐसे जातकों को अपने जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।बहुत बार यह देखने को मिला है कि लोगों को इस बात का आभास ही नहीं होता कि उन पर शनि का प्रकोप चल रहा है और ऐसे में वह अनजाने में ही वही गलतियां दोहराते जाते हैं जिससे शनि का प्रकोप उनके जीवन पर और अधिक होने लगता है। आज हम जानने का प्रयास करेंगे कि, व्यक्ति के जीवन में वह कौन से संकेत हैं जो इस बात की ओर संकेत करते हैं कि हमारे जीवन में शनि का प्रकोप चल रहा है जिन्हें दूर करके हमें शनि के प्रकोप से बच कर अपना जीवन सुखमय व्यतीत कर सकते हैं। हम इस विषय पर विस्तार से जानकारी के लिए आप बनें रहें वीडियो के अंत तक हमारे साथ, एवं वैदिक ऐस्ट्रो केयर चैनल को सब्सक्राइब कर नए वीडियो के नोटिफिकेशन की जानकारी के लिए वैल आइकन दबाकर ऑल सेलेक्ट अवश्य करें।
व्यक्ति के जीवन में शनि ग्रह के अशुभ होने की कुछ महत्वपूर्ण निशानियां होती हैं। जिन्हें हम अक्सर महत्व नहीं देते हैं। यहां कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जिन्हें देखकर आप जन्मकुंडली में शनि देव के अशुभ प्रभाव को जान सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति के जूते, चप्पल बार-बार टूटने लगे या खोने लगे, या आपका ऋण लगातार बढ़ता जाए, जीवन में बार बार ऐसा समय उपस्थित हो जब आपको न चाहते हुए भी ऋण लेना ही पड़े, तो यह इंगित करता है कि आपकी जन्मकुंडली में कहीं न् कहीं शनि की स्थिति ठीक नहीं है।
जिन व्यक्तियों के बाल, दांत और आँख समय से पहले कमजोर होने लगे यह भी शनि के अशुभ होने की ओर ही संकेत देते हैं। हालांकि कई मामलों में यह बातें किसी बीमारी की वजह से भी हो सकती हैं। ऐसे में अपनी जन्म कुंडली का पूर्ण विश्लेषण किसी विद्वान ज्योतिषी से करवाकर इस बारे में परामर्श अवश्य ले लेना चाहिए।
इसके अतिरिक्त ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ही यदि किसी व्यक्ति के बाल तेजी से गिरने लगते हैं तो यह भी इस बात की ओर संकेत है कि, उस व्यक्ति के जीवन पर शनि के प्रतिकूल प्रभाव हैं।
जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में, या प्रतिकूल होते हैं ऐसे व्यक्तियों के माथे का रंग बदलने लगता है। शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव के चलते व्यक्ति के परिवार, समाज व्यापार, व्यवसाय आदि में चीजें खराब होने लगती हैं और बनते बनते काम बिगड़ने लगते हैं।
यदि किसी व्यक्ति का मन अचानक से अनैतिक कामों की तरफ झुकने लगे तो यह भी इस बात की तरफ संकेत है कि, व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में है।
इसके अतिरिक्त यदि किसी व्यक्ति के भोजन और रहन सहन की शैली, या व्यवहार अचानक से बदलने लगे। व्यक्ति अचानक से कड़वे, तेल मसाले वाले या मांसाहारी भोजन की तरफ झुकाव रखने लगे तो फिर समझ जाना चाहिए कि यह शनि के प्रकोप के कारण ही हो रहा है।
साथ ही शनि का एक और अशुभ प्रभाव का संकेत यह है कि अक्सर देखा गया है कि व्यक्ति अधिक मिथ्या भाषण करने लगता है। और उनमें क्रोध की भावना भी बढ़ने लगती है।
ऐसे में यदि आप अपने घर परिवार के किसी सदस्य के अंदर इन बदलाव या बातों को देखें तो समझ जाना कि, उस व्यक्ति पर महादशा, अंतर्दशा, या गोचर आदि किसी न् किसी रूप में, शनि का प्रकोप चल रहा है जिससे बचने के लिए कुछ वैदिक उपाय करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। आप भी इन उपायों को अपनाकर शनि की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
जिन व्यक्तियों के जीवन में शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रही है उन्हें शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरो-कर शनिवार के दिन शाम के समय दाहिने हाथ में बांधना चाहिए। जीवन से शनि के प्रकोप को कम या दूर करने के लिए महादेव की उपासना करना बहुत फलदाई रहता है। अतः नित्यप्रति भगवान शिव को जल चढ़ाकर पूजा अवश्य करें। यदि आपके जीवन में शनि का प्रकोप चल रहा है तो आपको शिव सहस्त्रनाम और शिव पंचाक्षरी स्तोत्र का भी पाठ नियमित रूप से करना चाहिए। ऐसा करने से शनि के नकारात्मक परिणाम दूर होने लगते हैं। इसके अतिरिक्त प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करने से भी शनि प्रकोप शांत होता है। शनिवार और मंगलवार की शाम को हनुमानजी के मंदिर में यथाशक्ति बूंदी आदि मीठा प्रसाद भी चढाएं। शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए इस मंत्र का नित्य एक माला जाप करना श्रेष्ठ फलदायक होता है।
सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:।
मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।
साथ ही अपने घर में शमी का एक वृक्ष लगाएं और नियमित रूप से उसकी सेवा और पूजा करें।
शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर या पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करें।
शनि देव की प्रसन्नता प्राप्ति के लिए शनिवार को आप यह कुछ बहुत सरल उपाय भी अपना सकते हैं, जैसे
प्रत्येक शनिवार शनि मंदिर में जाने का नियम बनाएँ।
शनि देव की उपासना सच्चे मन से करें।
शनिवार के दिन शनिदेव से सम्बंधित वस्तुओं जैसे, सरसों का तेल, काला सूती कपड़ा, उड़द की दाल, लोहे का बर्तन, आदि का दान करना बहुत उत्तम माना गया है। ऐसे में आप चाहे तो इन वस्तुओं का दान शनिवार के दिन कर सकते हैं। शनिवार के दिन इन सभी वस्तुओं को खरीदने से भी बचें। छायापात्र दान करें।
शनिवार के दिन एक लोहे की कटोरी में सरसों का तेल लेकर तेल में अपना चेहरा, नाखून और बाल देखें और उसके बाद इस तेल को दान कर दें। अपने जन्म विवरण के आधार पर अपनी जन्म कुंडली के पूर्ण विश्लेषण हेतु आप हमसे संपर्क कर सकते हैं। वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन हेतु कामना करता है, नमस्कार।
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