शुक्रवार, 2 जनवरी 2026

जन्म कुंडली में विष योग क्या है? प्रभाव, लक्षण और शांति के उपाय

विष योग के लक्षण
जिन जातकों की जन्म कुंडली में विष योग बनता है, उनके जीवन में कुछ सामान्य लक्षण देखे जाते हैं। ऐसा व्यक्ति भीतर से अत्यधिक चिंतित रहता है और छोटी-छोटी बातों पर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। उसे बार-बार असफलता का सामना करना पड़ता है, चाहे वह पूरी मेहनत ही क्यों न करे। नींद में बाधा, अनावश्यक भय, आत्मविश्वास की कमी और अकेलापन इसके प्रमुख लक्षण माने जाते हैं। कई बार जातक को बिना स्पष्ट कारण के उदासी और निराशा घेर लेती है।

किन राशियों पर विष योग का प्रभाव अधिक होता है
विष योग का प्रभाव सभी राशियों पर समान नहीं होता। विशेष रूप से कर्क, मकर, कुंभ और वृश्चिक राशि के जातकों पर इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है। चंद्र प्रधान राशियों में यह योग मानसिक स्तर पर अधिक कष्ट देता है, जबकि शनि प्रधान राशियों में यह योग संघर्ष, देरी और जीवन की कठोर परिस्थितियों को बढ़ाता है। हालांकि कुंडली में अन्य शुभ ग्रहों की स्थिति होने पर इसके प्रभाव में कमी भी आ सकती है।

विष योग कब निष्फल हो जाता है
यदि जन्म कुंडली में शनि या चंद्र अपनी उच्च राशि, स्वगृही अथवा केंद्र-त्रिकोण में स्थित हों, तो विष योग का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है। इसके अतिरिक्त यदि गुरु की दृष्टि शनि-चंद्र युति पर हो, या लग्न मजबूत हो, तो यह योग पूर्ण रूप से अशुभ फल नहीं देता। कई बार शुभ दशा या अनुकूल गोचर के समय यह योग लगभग निष्फल भी हो जाता है।

विवाह, करियर और धन पर विष योग का प्रभाव
विवाह के क्षेत्र में विष योग देरी, गलत निर्णय या वैवाहिक तनाव उत्पन्न कर सकता है। पति-पत्नी के बीच भावनात्मक दूरी देखी जाती है। करियर में यह योग संघर्ष, बार-बार नौकरी बदलना, कार्यस्थल पर मानसिक दबाव और अपेक्षित सफलता में विलंब कराता है। धन के मामले में व्यक्ति मेहनत तो करता है, लेकिन धन टिक नहीं पाता। अचानक खर्चे और आर्थिक अस्थिरता बनी रहती है।

वास्तविक जीवन के उदाहरण
अनेक ऐसे जातक देखे गए हैं जिनकी कुंडली में विष योग होने के कारण प्रारंभिक जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा। पढ़ाई में बाधा, नौकरी में अस्थिरता और पारिवारिक तनाव उनके जीवन का हिस्सा रहे। लेकिन जैसे ही उन्होंने सही समय पर ग्रह शांति, दान और आत्मअनुशासन अपनाया, धीरे-धीरे परिस्थितियों में सुधार आया। इससे यह स्पष्ट होता है कि विष योग कष्टदायक अवश्य है, लेकिन अटल नहीं।

विष योग के शांति के 5 प्रभावी उपाय
नियमित रूप से सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें।
प्रत्येक शनिवार को शनि देव के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
पूर्णिमा के दिन सफेद वस्त्र, चावल या दूध का दान करें।
हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें और जीवन में संयम बनाए रखें।
यथासंभव मांस, मदिरा और नकारात्मक संगति से दूरी बनाए रखें।
इन उपायों को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से विष योग के दुष्प्रभावों में निश्चित रूप से कमी आती है।

Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख सामान्य वैदिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रकार के उपाय या निर्णय को अपनाने से पूर्व योग्य ज्योतिषाचार्य से व्यक्तिगत कुंडली परीक्षण अवश्य कराएं। यह जानकारी केवल सामान्य मार्गदर्शन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है।

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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