नमस्कार। वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है।
कुंडली में बनने वाले कुछ ऐसे योग होते हैं जो जीवन को बदल देने का सामर्थ्य रखते हैं। इनमें कुछ योग राजयोग कहलाते हैं, जो जीवन में सफलता, मान-सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं, जबकि कुछ योग ऐसे होते हैं जो जीवन में असफलता, संघर्ष, मानसिक पीड़ा और अनेक समस्याओं को जन्म देते हैं। इन्हें दुर्योग, अशुभ योग अथवा दोष कहा जाता है।
वैदिक ज्योतिष में ग्रहों और नक्षत्रों के आधार पर अनेक प्रकार के संयोग बनते हैं, जो व्यक्ति के संपूर्ण जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। सामान्यतः हम अच्छे योगों के विषय में अधिक पढ़ते और सुनते हैं, किंतु आज वैदिक ऐस्ट्रो केयर के इस विशेष लेख में हम आपको वैदिक ज्योतिष में माने जाने वाले पाँच सबसे खतरनाक अशुभ योगों के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि ये योग जीवन पर किस प्रकार प्रभाव डालते हैं और इनसे मुक्ति पाने के लिए शास्त्रों में कौन-कौन से प्रभावी उपाय बताए गए हैं।
1. केमद्रुम योग (Kemdrum Yog)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार केमद्रुम दोष चंद्रमा की विशेष स्थिति के कारण बनता है। यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस भाव या राशि में स्थित हो, उससे दूसरे और बारहवें भाव में सूर्य के अतिरिक्त कोई भी ग्रह न हो, तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है। यदि इन भावों में राहु या केतु में से कोई भी ग्रह उपस्थित हो, तब भी केमद्रुम दोष माना जाता है।
महर्षि वराहमिहिर ने बृहद्जातक में तथा मंत्रेश्वर महाराज ने अपने ग्रंथों में इस योग के फलों का विस्तार से वर्णन किया है। उनके अनुसार केमद्रुम योग से ग्रस्त व्यक्ति जीवन में दुखी, मानसिक रूप से अशांत, निर्धन तथा दूसरों के अधीन कार्य करने वाला हो सकता है। शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति राजघराने में भी जन्म ले, फिर भी इस योग के प्रभाव से उसे जीवन में कठिनाइयों और संघर्षों का सामना करना पड़ता है।
केमद्रुम योग के प्रभाव
आर्थिक अस्थिरता और गरीबी
मानसिक तनाव और अवसाद
जीवन में निरंतर संघर्ष
आत्मविश्वास की कमी
केमद्रुम योग के शांति उपाय
भगवान शिव की नियमित उपासना करें और प्रतिदिन जल या गाय के दूध से अभिषेक करें।
शिव सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
पूर्णिमा का व्रत रखें, विशेष रूप से यदि पूर्णिमा सोमवार को हो।
श्री यंत्र की स्थापना कर विधिवत पूजा करें और श्री सूक्त का पाठ करें।
माता का सम्मान करें और उनकी सेवा करें।
दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना कर नियमित रूप से जल भरें और उसी जल से माता लक्ष्मी का अभिषेक करें।
चंद्रमा के बीज मंत्रों का नियमित जाप करें।
2. चांडाल दोष (Guru Chandal Yog)
जब किसी कुंडली में बृहस्पति और राहु एक ही राशि या भाव में स्थित हों, अथवा आपस में दृष्टि संबंध बनाएं, तब गुरु चांडाल योग या चांडाल दोष बनता है। यह एक अत्यंत अशुभ योग माना जाता है।
चांडाल दोष के प्रभाव
यह योग व्यक्ति की चेतना, विवेक और ज्ञान को प्रभावित करता है। ऐसे जातक में भौतिक लालसा अधिक होती है, वह सही और गलत के बीच अंतर करना भूल सकता है और कई बार चारित्रिक पतन का शिकार हो जाता है। जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधाएं आती हैं और मानसिक अस्थिरता बढ़ती है।
चांडाल दोष के शांति उपाय
किसी योग्य ब्राह्मण से गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा कराएं।
बृहस्पतिवार को ब्राह्मणों का सम्मान और दान करें।
केले का वृक्ष लगाकर उसकी पूजा करें।
बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा करें और पीला चंदन अर्पित करें।
राहु ग्रह की शांति के लिए राहु बीज मंत्र का जाप करें।
विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री का दान करें।
गौ माता की सेवा करें और हरी घास खिलाएं।
वटवृक्ष की जड़ में कच्चा दूध अर्पित करें।
भगवान गणेश और माता सरस्वती की नियमित आराधना करें।
3. मांगलिक दोष (Mangal Dosha)
जब किसी जातक की कुंडली में मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तब मांगलिक दोष बनता है। यह दोष मुख्यतः वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है।
मांगलिक दोष के प्रभाव
विवाह में विलंब
संबंध टूटना या विवाह के बाद कलह
दांपत्य जीवन में मानसिक, शारीरिक और आर्थिक तनाव
मांगलिक दोष के उपाय
मांगलिक दोष शांति पूजा कराएं।
विशेष स्थिति में कुंभ विवाह या अर्क विवाह करें।
मंगल चंडिका स्तोत्र का पाठ करें।
केसरिया रंग के गणपति की पूजा करें।
बंदरों और कुत्तों को मीठी रोटी खिलाएं।
चांदी का बिना जोड़ का कड़ा धारण करें।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
मां मंगला गौरी और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।
मांगलिक जातक को मांगलिक से विवाह करना चाहिए।
4. अंगारक दोष (Angarak Yog)
जब मंगल ग्रह के साथ राहु या केतु एक ही भाव में हों, या आपस में दृष्टि संबंध बनाएं, तब अंगारक दोष बनता है। यह योग अत्यंत उग्र और कष्टदायक माना जाता है।
अंगारक दोष के प्रभाव
अत्यधिक क्रोध और आवेग
दुर्घटना की संभावना
भाई-बंधुओं से विवाद
शत्रुओं का भय और मानसिक तनाव
अंगारक दोष के उपाय
योग्य विद्वान से अंगारक योग निवारण पूजा कराएं।
मंगल-राहु या मंगल-केतु शांति मंत्रों का जाप और हवन कराएं।
मंगलवार को हनुमान मंदिर में लाल झंडा लगाएं।
बजरंग बाण का पाठ करें और हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।
तांबे का कंगन या अंगूठी धारण करें।
ॐ अं अंगारकाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
अपने भाइयों की सहायता करें और ससुराल पक्ष से संबंध मधुर रखें।
5. विष योग (Vish Yog)
जब कुंडली में शनि और चंद्रमा की युति या दृष्टि संबंध बनता है, तब विष योग का निर्माण होता है। चंद्रमा को अमृत तुल्य माना गया है, किंतु शनि की दृष्टि से यह विष योग बन जाता है।
विष योग के प्रभाव
निराशा और मानसिक अवसाद
निर्णय क्षमता में कमी
रिश्तों में दूरी
अकेलापन और तनाव
विष योग के उपाय
चंद्रमा और शनि के मंत्रों का जाप करें।
भगवान शिव का रुद्राभिषेक कराएं, विशेषकर जन्मदिन पर।
रात में दूध पीने से बचें।
बासी भोजन न करें और सात्त्विक आहार लें।
ध्यान और योग को जीवन का हिस्सा बनाएं।
कठिन समय में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
निष्कर्ष
वैदिक ज्योतिष में अशुभ योग जीवन को कठिन बना सकते हैं, किंतु उचित ज्ञान, सही मार्गदर्शन और शास्त्र सम्मत उपायों से इनके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति की कुंडली भिन्न होती है, इसलिए सटीक उपायों के लिए व्यक्तिगत कुंडली विश्लेषण आवश्यक है।
ग्रह शांति एवं जन्मपत्रिका के विश्लेषण हेतु आप वैदिक ऐस्ट्रो केयर से संपर्क कर सकते हैं।
वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय, सुखी और सफल जीवन की कामना करता है।
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