श्रीमद्भगवद्गीता द्वितीय अध्याय के तिरेसठवें श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं-
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः । स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ।। ६३ ।।
अर्थात, क्रोध से पूर्ण मोह उत्पन्न होता है और मोह से स्मरण शक्ति का विभ्रम हो जाता है । जब स्मरण शक्ति भ्रमित हो जाती है , तो बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि नष्ट होने पर मनुष्य भव - कूप में पुनः गिर जाता है। क्रोध रूपी परम शत्रु से होने वाली हानि का यह आध्यात्मिक पक्ष है। यदि लौकिक पक्ष की बात करें, तो क्षणिक क्रोध भी कभी कभी मानव के सम्पूर्ण जीवन को ही बिगाड़ देता है। ऐसे उदाहरण प्रतिदिन ही हजारों की संख्या में देखने को मिलते हैं। यहां विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि, क्रोध करना श्रेष्ठ गुण है। किंतु क्रोध आना बहुत बड़ा दुर्गुण है। ध्यान से समझें। यदि किसी भी परिस्थिति में आपको स्वयं क्रोध हो आए तो यह दुर्गुण है। क्योंकि ऐसी स्थिति में ही क्रोध से पूर्ण मोह उत्पन्न होता है। अर्थात व्यक्ति क्रोध के वशीभूत हो जाता है। और इस अवस्था में स्मरण शक्ति का विभ्रम हो जाता है । जब स्मरण शक्ति भ्रमित हो जाती है , तो बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि नष्ट होने पर मनुष्य तन,मन, धन आदि की हानि कर बैठता है। अतः क्रोध यदि स्वयं आए तो दुर्गुण है। किंतु क्रोध यदि विचार कर किया जाए तो यह एक गुण है। भगवान श्री कृष्ण ने भीष्म पितामह को यही तो कहा था, की यदि चीर हरण के समय आपने क्रोध दिखा दिया होता, तो आज कुरुवंश का नाश नहीं होता। भगवान ने स्वयं अपनी प्रतिज्ञा को तोड़कर भी भीष्म पितामह पर क्रोध किया, और रथ के पहिए से उन्हें मारने दौड़ पड़े। यदि आप समय पर क्रोध नहीं करते तो कहीं न कहीं आपके भीतर कायरता का वास है। अतः समय पर विचार पूर्वक क्रोध करना एक गुण है।
किन्तु यदि क्रोध आ जाता हो तो ऐसे क्रोध को व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु माना गया है। यदि आप बहुत अधिक क्रोध करते हैं तो स्वाभाविक है की आप कहीं भी ध्यान एकाग्र नहीं कर पाएंगे जिसके कारण आपको जीवन में अनेक प्रकार की समस्याओं और हानियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में बहुत आवश्यक है कि सर्वप्रथम आपको अपने जीवन से क्रोध और तनाव को दूर करना होगा तभी आप कोई भी सफलता प्राप्त कर पाएंगे। मंगलवार के दिन किए जाने वाले कुछ श्रेष्ठ उपायों के बारे में आज हम चर्चा करेंगे, आप वीडियो को अंत तक पूरा अवश्य देखें, साथ ही वैदिक ऐस्ट्रो केयर चैनल को सब्सक्राइब कर नए वीडियो के नोटिफिकेशन की जानकारी के लिए वैल आइकन दबाकर ऑल सेलेक्ट अवश्य करें। अनावश्यक क्रोध एवं मानसिक तनाव से बचने के लिए, मंगलवार के दिन आप यह कुछ उपाय अपना सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य के लिए बजरंगबली की उपासना के साथ आप मंगलवार का विधिवत उपवास करें।
इसके लिए मंगलवार के दिन प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और उसके बाद पूजा और व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन व्रत करें। मंगलवार के व्रत में नमक नहीं खाया जाता है इस बात का विशेष ध्यान रखें। फलाहार ले सकते हैं। कुछ ही दिन व्रत करने से आप अपने अंदर सकारात्मक परिवर्तन अवश्य अनुभव करेंगे।
मंगलवार के दिन श्रद्धापूर्वक सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो इससे व्यक्ति के जीवन में अनेक तरह के सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। साथ ही इससे व्यक्ति का मन शांत होता है और किसी भी प्रकार के बुरे विचार, भूत पिशाच से डर या तनाव दूर होता है।
मंगलवार के दिन हनुमान जी को चोला अवश्य चढ़ाएं। इसके लिए चमेली के तेल और कामी सिंदूर का प्रयोग करें। कहते हैं चोला चढ़ाने से हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के जीवन से तमाम तरह के कष्ट और परेशानियां दूर करते हैं।
मंगलवार का व्रत और पूजन कर रहे हैं तो आप मंगलवार के दिन बजरंगबली को तुलसी भी अवश्य चढ़ाएं। कहा जाता है बजरंगबली को तुलसी बहुत ही प्रिय होती है। ऐसे में आप चाहें तो तुलसी के पत्ते को पहले साफ कर लें, उसके बाद उस पर सिंदूर से श्री राम लिखकर बजरंगबली को चढ़ा दें। ऐसा करने से आपका मन शांत होगा क्रोध और ईर्ष्या दूर होगी। साथ ही जीवन में पनपने वाले किसी भी तरह के बुरे विचारों से भी आप को मुक्ति मिलेगी।
वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन हेतु कामना करता है, नमस्कार।
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