सूर्य के बारहों भावों में स्थित होने पर उसके द्वादश भाव में बनने वाले वाशी योग का फल
नोट: यहाँ प्रत्येक स्थिति में यह माना गया है कि सूर्य से द्वादश भाव में चन्द्रमा को छोड़कर कोई ग्रह स्थित है, जिससे वाशी योग बन रहा है।
1. सूर्य प्रथम भाव में, वाशी योग द्वादश भाव में
गंभीर, अनुशासित और आत्मसंयमी व्यक्तित्व।
विदेश, आध्यात्मिक कार्य या एकांत में सफलता।
खर्चों पर नियंत्रण रखने की क्षमता।
आत्मबल से उन्नति।
2. सूर्य द्वितीय भाव में, वाशी योग प्रथम भाव में
प्रभावशाली वाणी और आकर्षक व्यक्तित्व।
परिवार और समाज में सम्मान।
धन अर्जित करने की अच्छी क्षमता।
नेतृत्व एवं व्यापार में सफलता।
3. सूर्य तृतीय भाव में, वाशी योग द्वितीय भाव में
पराक्रम के साथ धन वृद्धि।
लेखन, वाणी और संचार से लाभ।
भाई-बहनों का सहयोग।
अपने प्रयासों से आर्थिक उन्नति।
4. सूर्य चतुर्थ भाव में, वाशी योग तृतीय भाव में
शिक्षा, संपत्ति और वाहन का सुख।
साहस और निर्णय क्षमता में वृद्धि।
प्रशासनिक एवं सार्वजनिक जीवन में सफलता।
माता का सहयोग।
5. सूर्य पंचम भाव में, वाशी योग चतुर्थ भाव में
उच्च शिक्षा एवं विद्या में सफलता।
बुद्धिमत्ता के साथ संपत्ति का लाभ।
संतान सुख।
शिक्षा, अध्यापन एवं परामर्श में उन्नति।
6. सूर्य षष्ठ भाव में, वाशी योग पंचम भाव में
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
शत्रुओं पर विजय।
बुद्धि और रणनीति से समस्याओं का समाधान।
प्रशासन, चिकित्सा एवं न्याय क्षेत्र में उन्नति।
7. सूर्य सप्तम भाव में, वाशी योग षष्ठ भाव में
व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में विजय।
साझेदारी में सावधानी के साथ सफलता।
जनसंपर्क और सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठा।
विरोधियों पर नियंत्रण।
8. सूर्य अष्टम भाव में, वाशी योग सप्तम भाव में
शोध, ज्योतिष और गूढ़ विषयों में सफलता।
जीवनसाथी से सहयोग।
अचानक लाभ की संभावना।
कठिन परिस्थितियों से उभरने की क्षमता।
9. सूर्य नवम भाव में, वाशी योग अष्टम भाव में
आध्यात्मिक और गूढ़ ज्ञान में रुचि।
भाग्य धीरे-धीरे प्रबल होता है।
गुरु कृपा एवं शोध कार्यों में सफलता।
जीवन में परिवर्तन के बाद उन्नति।
10. सूर्य दशम भाव में, वाशी योग नवम भाव में
अत्यंत शुभ स्थिति।
भाग्य और कर्म का उत्कृष्ट समन्वय।
उच्च प्रशासनिक पद, सरकारी सम्मान और प्रसिद्धि।
धर्मपरायण, न्यायप्रिय एवं सफल नेतृत्वकर्ता।
11. सूर्य एकादश भाव में, वाशी योग दशम भाव में
करियर से बड़ी आय।
उच्च अधिकारियों एवं प्रभावशाली लोगों से लाभ।
इच्छाओं की पूर्ति।
व्यापार और नौकरी दोनों में उन्नति।
12. सूर्य द्वादश भाव में, वाशी योग एकादश भाव में
विदेश से लाभ और आय।
आध्यात्मिक कार्यों से प्रतिष्ठा।
प्रभावशाली मित्रों का सहयोग।
अंतरराष्ट्रीय कार्यों, आयात-निर्यात या बहुराष्ट्रीय संस्थानों में सफलता।
महत्वपूर्ण निष्कर्ष
यदि वाशी योग बुध, गुरु या शुक्र से बने तो शुभ फल अधिक मिलते हैं।
यदि मंगल या शनि से बने तो संघर्ष के बाद स्थायी सफलता मिलती है।
यदि राहु या केतु से बने तो असाधारण या अप्रत्याशित परिणाम मिल सकते हैं, जिनका स्वरूप संपूर्ण कुंडली पर निर्भर करता है।
अंतिम फलादेश में सूर्य का बल, योग बनाने वाले ग्रह का बल, दृष्टियाँ, युतियाँ, दशा, गोचर और नवांश का सम्यक् विचार करना अनिवार्य है।
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