उभयचारी योग तब बनता है जब सूर्य से द्वितीय और द्वादश दोनों भावों में चन्द्रमा को छोड़कर एक या अधिक ग्रह स्थित हों। यह योग तीनों सूर्य योगों (वेशी, वाशी और उभयचारी) में सबसे प्रभावशाली माना गया है। ऐसा जातक सामान्यतः बुद्धिमान, संतुलित, प्रभावशाली, प्रतिष्ठित और नेतृत्व क्षमता वाला होता है।
नीचे सूर्य के भाव के अनुसार उभयचारी योग का फल दिया गया है।
1. सूर्य प्रथम भाव में
(द्वितीय और द्वादश भाव में ग्रह)
प्रभावशाली व्यक्तित्व एवं तेजस्विता।
आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रसिद्धि।
धन, सम्मान एवं समाज में प्रतिष्ठा।
प्रशासन, राजनीति या व्यवसाय में सफलता।
2. सूर्य द्वितीय भाव में
(तृतीय और प्रथम भाव में ग्रह)
मधुर एवं प्रभावशाली वाणी।
धन संचय और व्यापार में सफलता।
साहस एवं व्यक्तित्व का अच्छा संतुलन।
परिवार में सम्मान।
3. सूर्य तृतीय भाव में
(चतुर्थ और द्वितीय भाव में ग्रह)
पराक्रम के साथ भूमि, भवन एवं धन का लाभ।
लेखन, संचार और मीडिया में सफलता।
भाइयों का सहयोग।
अपने प्रयासों से उन्नति।
4. सूर्य चतुर्थ भाव में
(पंचम और तृतीय भाव में ग्रह)
शिक्षा, विद्या और बुद्धि का विकास।
संपत्ति एवं वाहन का सुख।
प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र में सफलता.
संतान से यश।
5. सूर्य पंचम भाव में
(षष्ठ और चतुर्थ भाव में ग्रह)
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता।
शत्रुओं पर विजय।
शिक्षा और संपत्ति दोनों का लाभ।
संतान योग्य एवं प्रतिभाशाली।
6. सूर्य षष्ठ भाव में
(सप्तम और पंचम भाव में ग्रह)
व्यापार एवं साझेदारी में सफलता।
बुद्धि और रणनीति से शत्रुओं पर विजय।
न्याय, चिकित्सा और प्रशासन में उन्नति।
दाम्पत्य जीवन में सहयोग।
7. सूर्य सप्तम भाव में
(अष्टम और षष्ठ भाव में ग्रह)
कठिन परिस्थितियों में भी सफलता।
व्यापारिक प्रतिस्पर्धा में विजय।
शोध, बीमा, चिकित्सा या गूढ़ विषयों में लाभ।
विरोधियों पर नियंत्रण।
8. सूर्य अष्टम भाव में
(नवम और सप्तम भाव में ग्रह)
भाग्य और जीवनसाथी दोनों का सहयोग।
शोध, ज्योतिष और आध्यात्मिक क्षेत्र में उन्नति।
विदेश या उच्च शिक्षा से लाभ।
जीवन में बड़े परिवर्तन के बाद सफलता।
9. सूर्य नवम भाव में
(दशम और अष्टम भाव में ग्रह)
भाग्य और कर्म दोनों प्रबल।
उच्च प्रशासनिक पद की संभावना।
धर्म, शोध और नेतृत्व का अद्भुत समन्वय।
पिता एवं गुरु से लाभ।
10. सूर्य दशम भाव में
(एकादश और नवम भाव में ग्रह)
उभयचारी योग की अत्यंत श्रेष्ठ स्थितियों में से एक।
उच्च पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक समृद्धि।
सरकार, राजनीति, प्रशासन और बड़े व्यवसाय में सफलता।
समाज में यश और सम्मान।
11. सूर्य एकादश भाव में
(द्वादश और दशम भाव में ग्रह)
अनेक स्रोतों से आय।
विदेश एवं करियर दोनों से लाभ।
प्रभावशाली मित्रों एवं उच्च अधिकारियों का सहयोग।
इच्छाओं की पूर्ति।
12. सूर्य द्वादश भाव में
(प्रथम और एकादश भाव में ग्रह)
विदेश में सफलता एवं प्रतिष्ठा।
प्रभावशाली व्यक्तित्व और व्यापक संपर्क।
आध्यात्मिक उन्नति के साथ आर्थिक लाभ।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों या बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सफलता।
विशेष नियम
गुरु, शुक्र और बुध से बना उभयचारी योग अत्यंत शुभ माना जाता है।
मंगल और शनि से बना उभयचारी योग संघर्ष के बाद उच्च सफलता देता है।
राहु या केतु सम्मिलित होने पर असाधारण परिणाम मिल सकते हैं, जिनका स्वरूप संपूर्ण कुंडली पर निर्भर करता है।
योग का अंतिम फल हमेशा ग्रहों के बल, राशि, दृष्टि, युति, दशा और गोचर के आधार पर ही निश्चित किया जाता है।
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