गुरुवार, 30 जुलाई 2026

D-3 क्यों कहा जाता है? षोडशवर्ग क्या है

D-3 क्यों कहा जाता है?
वैदिक ज्योतिष में D का अर्थ है Division (विभाजन) या Divisional Chart (वर्ग कुंडली) और 3 उस विभाजन की संख्या को दर्शाता है।
अर्थात् D-3 = तीसरी विभाजित (वर्ग) कुंडली।
D का अर्थ
D = Divisional Chart (वर्ग कुंडली)
राशि कुंडली (D-1) को विभिन्न उद्देश्यों के लिए अलग-अलग भागों में विभाजित किया जाता है। इन विभाजनों से बनने वाली कुंडलियों को Divisional Charts या वर्ग कुंडलियाँ कहा जाता है।
3 का अर्थ
3 = राशि का तीन भागों में विभाजन
प्रत्येक राशि 30° की होती है। जब इसे 3 बराबर भागों (10° + 10° + 10°) में बाँटा जाता है, तो जो वर्ग कुंडली बनती है उसे D-3 (द्रेष्काण / Drekkana) कहते हैं।
अन्य D चार्ट भी इसी सिद्धांत पर आधारित हैं
D संख्या
नाम
प्रत्येक राशि का विभाजन
मुख्य विषय
D-1
राशि
1 भाग
सम्पूर्ण जीवन
D-2
होरा
2 भाग
धन
D-3
द्रेष्काण
3 भाग
पराक्रम, भाई-बहन
D-4
चतुर्थांश
4 भाग
संपत्ति
D-7
सप्तमांश
7 भाग
संतान
D-9
नवांश
9 भाग
धर्म, विवाह
D-10
दशमांश
10 भाग
कर्म, व्यवसाय
D-12
द्वादशांश
12 भाग
माता-पिता
D-16
षोडशांश
16 भाग
वाहन, सुख
D-20
विंशांश
20 भाग
आध्यात्मिकता
D-24
चतुर्विंशांश
24 भाग
शिक्षा
D-27
सप्तविंशांश
27 भाग
शक्ति
D-30
त्रिंशांश
30 भाग
दोष, कष्ट
D-40
खवेदांश
40 भाग
शुभ-अशुभ संस्कार
D-45
अक्षवेदांश
45 भाग
चरित्र
D-60
षष्ट्यांश
60 भाग
पूर्वजन्म कर्म
सार
D = Divisional (वर्ग) Chart
संख्या = प्रत्येक राशि के विभाजनों की संख्या
D-3 = प्रत्येक 30° राशि को 3 भागों (10°-10°-10°) में बाँटकर बनने वाली वर्ग कुंडली, जिसे द्रेष्काण (Drekkana) कहा जाता है।
इसी प्रकार D-9 का अर्थ है 30° राशि को 9 भागों में विभाजित कर बनी नवांश कुंडली, D-10 का अर्थ है 10 भागों में विभाजित कर बनी दशमांश कुंडली, और इसी क्रम से अन्य सभी वर्ग कुंडलियाँ निर्मित होती हैं।

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Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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