नवतारा चक्र (Navatārā Chakra) – सम्पूर्ण विश्लेषण
नवतारा चक्र वैदिक ज्योतिष एवं मुहूर्त शास्त्र की अत्यन्त महत्वपूर्ण पद्धति है। इसके द्वारा जन्म नक्षत्र के आधार पर 27 नक्षत्रों की व्यक्ति-विशेष के लिए शुभाशुभता का निर्णय किया जाता है। यह प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग होता है, क्योंकि इसका आधार उसका जन्म नक्षत्र है।
इसका प्रयोग मुख्यतः मुहूर्त चयन, चन्द्र गोचर फल, यात्रा, विवाह, व्यापार, चिकित्सा, साधना तथा दैनिक शुभाशुभ विचार में किया जाता है।
नवतारा का अर्थ
नव + तारा = नौ तारे (नौ वर्ग)
27 नक्षत्रों को 9-9 के तीन चक्रों में विभाजित किया जाता है।
27 ÷ 9 = 3
अर्थात प्रत्येक तारा वर्ग में 3 नक्षत्र आते हैं।
नवतारा चक्र कैसे बनता है?
सबसे पहले जन्म नक्षत्र ज्ञात किया जाता है।
फिर जन्म नक्षत्र से आगे गिनते हुए प्रत्येक नक्षत्र को क्रमांक दिया जाता है।
गिनती
तारा
1
जन्म
2
सम्पत्
3
विपत्
4
क्षेम
5
प्रत्यक्
6
साधन
7
नैधन (वध)
8
मित्र
9
परममित्र
इसके बाद
10 = जन्म
11 = सम्पत्
12 = विपत्
...
18 = परममित्र
19 = जन्म
...
27 = परममित्र
27 नक्षत्रों पर नवतारा क्रम
क्रम
तारा
1
जन्म
2
सम्पत्
3
विपत्
4
क्षेम
5
प्रत्यक्
6
साधन
7
नैधन
8
मित्र
9
परममित्र
10
जन्म
11
सम्पत्
12
विपत्
13
क्षेम
14
प्रत्यक्
15
साधन
16
नैधन
17
मित्र
18
परममित्र
19
जन्म
20
सम्पत्
21
विपत्
22
क्षेम
23
प्रत्यक्
24
साधन
25
नैधन
26
मित्र
27
परममित्र
उदाहरण
मान लीजिए किसी व्यक्ति का जन्म नक्षत्र रोहिणी है।
नक्षत्र
तारा
रोहिणी
जन्म
मृगशीर्षा
सम्पत्
आर्द्रा
विपत्
पुनर्वसु
क्षेम
पुष्य
प्रत्यक्
आश्लेषा
साधन
मघा
नैधन
पूर्वाफाल्गुनी
मित्र
उत्तराफाल्गुनी
परममित्र
फिर
हस्त = जन्म
चित्रा = सम्पत्
स्वाती = विपत्
इत्यादि।
प्रत्येक तारा का विस्तृत फल
1. जन्म तारा
अर्थ – स्वयं, शरीर, मन
फल
मानसिक चंचलता
आत्मचिन्तन
स्वास्थ्य पर ध्यान
नए कार्य में सावधानी
उपयुक्त कार्य
ध्यान
जप
आत्मविश्लेषण
2. सम्पत् तारा
अर्थ – धन एवं लाभ
फल
धन प्राप्ति
व्यापार वृद्धि
आय में वृद्धि
आर्थिक सफलता
उत्तम कार्य
निवेश
व्यापार
खरीदारी
धन सम्बन्धी निर्णय
3. विपत् तारा
अर्थ – विपत्ति
फल
बाधा
दुर्घटना की आशंका
विवाद
आर्थिक हानि
बचना चाहिए
यात्रा
नया व्यापार
जोखिम
4. क्षेम तारा
अर्थ – कल्याण
फल
स्वास्थ्य लाभ
सुरक्षा
सुख
परिवार में शांति
श्रेष्ठ कार्य
गृह प्रवेश
पारिवारिक कार्य
चिकित्सा
5. प्रत्यक् तारा
अर्थ – सामने आने वाला विरोध
फल
विरोध
मुकदमा
रुकावट
विलम्ब
बचना चाहिए
सरकारी कार्य
महत्वपूर्ण समझौते
6. साधन तारा
अर्थ – सिद्धि
फल
सफलता
परीक्षा में लाभ
साधना में प्रगति
लक्ष्य की प्राप्ति
श्रेष्ठ कार्य
प्रतियोगी परीक्षा
मंत्र सिद्धि
शोध
व्यवसाय विस्तार
7. नैधन (वध) तारा
अर्थ – नाश
सबसे अशुभ माना जाता है।
फल
हानि
रोग
दुर्घटना
मानसिक तनाव
आर्थिक नुकसान
इस दिन बचें
विवाह
यात्रा
निवेश
शुभारम्भ
8. मित्र तारा
फल
मित्र सहयोग
सफलता
सम्मान
प्रसन्नता
9. परममित्र तारा
सबसे श्रेष्ठ तारा।
फल
सर्वकार्य सिद्धि
प्रतिष्ठा
उन्नति
शुभ समाचार
राजकीय लाभ
नवतारा चक्र का प्रयोग कहाँ होता है?
1. मुहूर्त में
सबसे अधिक प्रयोग।
यदि चन्द्रमा शुभ तारा में हो तो कार्य सफल माना जाता है।
2. चन्द्र गोचर फल
प्रतिदिन चन्द्रमा जिस नक्षत्र में रहता है, उस नक्षत्र का जन्म नक्षत्र से सम्बन्ध देखकर उस दिन का फल निकाला जाता है।
3. विवाह
विवाह मुहूर्त चयन में तारा बल देखा जाता है।
4. यात्रा
यात्रा प्रारम्भ करते समय विपत्, प्रत्यक् एवं नैधन तारा से बचना श्रेष्ठ माना गया है।
5. चिकित्सा
ऑपरेशन या महत्वपूर्ण उपचार के लिए शुभ तारा का विचार किया जाता है।
6. व्यापार
नई दुकान, कम्पनी, अनुबन्ध आदि के लिए सम्पत्, साधन एवं परममित्र तारा श्रेष्ठ माने जाते हैं।
7. साधना
दीक्षा, अनुष्ठान, जप एवं होम के आरम्भ में साधन, मित्र एवं परममित्र तारा विशेष फलदायी माने जाते हैं।
चन्द्र गोचर से नवतारा कैसे देखें?
मान लीजिए—
जन्म नक्षत्र = रोहिणी
आज चन्द्रमा = आश्लेषा
गिनती:
रोहिणी
मृगशीर्षा
आर्द्रा
पुनर्वसु
पुष्य
आश्लेषा
अतः आज साधन तारा है।
फल—कार्यसिद्धि, अध्ययन, साधना और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अनुकूल।
कौन-से तारे शुभ और कौन-से अशुभ?
अत्यन्त शुभ
सम्पत्
क्षेम
साधन
मित्र
परममित्र
मध्यम
जन्म
सावधानी योग्य
विपत्
प्रत्यक्
नैधन
नवतारा और तारा बल
मुहूर्त शास्त्र में नवतारा से प्राप्त शुभाशुभ स्थिति को तारा बल कहा जाता है। पंचांग के पाँच अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) के अतिरिक्त मुहूर्त निर्णय में तारा बल का भी महत्वपूर्ण स्थान है। यदि अन्य योग अच्छे हों, परन्तु तारा बल अत्यन्त प्रतिकूल (विशेषतः नैधन) हो, तो आचार्य आवश्यकता अनुसार शान्ति या वैकल्पिक मुहूर्त का विचार करते हैं।
शास्त्रीय महत्व
मुहूर्त ग्रन्थों जैसे मुहूर्त चिन्तामणि, धर्मसिन्धु, निर्णयसिन्धु, कालप्रकाशिका आदि में तारा बल एवं नवतारा का वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार किसी कार्य की सफलता केवल सामान्य शुभ नक्षत्र पर नहीं, बल्कि उस नक्षत्र का व्यक्ति के जन्म नक्षत्र से सम्बन्ध भी महत्वपूर्ण होता है। यही सम्बन्ध नवतारा चक्र स्पष्ट करता है।
निष्कर्ष
नवतारा चक्र व्यक्ति-विशेष के लिए नक्षत्रों की व्यक्तिगत शुभाशुभता का मानदण्ड है। यह केवल सामान्य नक्षत्र-फल नहीं बताता, बल्कि यह दर्शाता है कि जन्म नक्षत्र की तुलना में वर्तमान नक्षत्र आपके लिए कैसा है। इसलिए मुहूर्त, चन्द्र गोचर, यात्रा, विवाह, व्यापार, चिकित्सा, साधना और दैनिक निर्णयों में इसका अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। सही प्रकार से प्रयोग करने पर यह शुभ समय के चयन और संभावित बाधाओं से बचने का प्रभावी ज्योतिषीय उपकरण सिद्ध होता है।
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