नमस्कार। वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपज हार्दिक अभिनंदन है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य, चन्द्र , मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु यह नौ ग्रह हैं। तथा मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या,
तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन यह बारह राशियां हैं। बालक के जन्म समय में चन्द्र ग्रह जिस राशि में गोचर कर रहे होते हैं, वही जातक की चन्द्र राशि कहलाती है। इसे आप बड़ी सहजता से अपनी जन्म कुंडली के जन्मांग चक्र को देखकर जान सकते हैं। जन्म कुंडली के बारह भावों, अर्थात बारह स्थानों में एक से लेकर बारह तक की संख्या लिखी होती हैं। साथ ही सांकेतिक रूप से नौ ग्रहों के नाम, आ चँ भौ रा वृ श बु के शु आदि लिखे होते हैं। जिस स्थान में चन्द्र लिखा हो, उस भाव में जो संख्या लिखी गई हो, वही आपकी चन्द्र राशि होगी। एक लिखा हो तो मेष राशि, दो लिखा हो तो वृष राशि, इसी प्रकार क्रम से तीन में मिथुन, चार में कर्क, पांच में सिंह, छः में कन्या, सात में तुला, आठ में वृश्चिक,, नौ में धनु, दस में मकर, ग्यारह में कुम्भ, और यदि बारह अंक लिखा हो तो मीन राशि होगी। आज हम मेष से मीन पर्यंत सभी बारह राशियों के जातकों के स्वरूप, स्वभाव के बारे में संक्षिप्त रूप से जानने का प्रयास करेंगे। आप अपनी राशि के बारे में जानने के लिए बने रहें वीडियो के अंत तक हमारे साथ, एवं वैदिक ऐस्ट्रो केयर चैनल को सब्सक्राइब कर नए वीडियो के नोटिफिकेशन की जानकारी के लिए वैल आइकन दबाकर ऑल सेलेक्ट अवश्य करें।
सर्वप्रथम बात करते हैं, राशिचक्र की पहली राशि मेष राशि के जातकों के स्वरूप स्वभाव के बारे में।
मेषराशिमें चन्द्रमाके विद्यमान होनेपर जातकके
लिये कहा गया है-
लोलनेत्रः सदा रोगी धर्मार्थकृतनिश्चयः ।
पृथुजङ्घः कृतघ्नश्च निष्पापो राजपूजितः॥
कामिनीहृदयानन्दो दाता भीतो जलादपि।
चण्डकर्मा मृदुश्चान्ते मेषराशौ भवेन्नरः॥
अर्थात् जिस जातकका जन्म मेषराशिके चन्द्रमामें
होता है, वह चंचल नेत्रोंवाला, प्रायः रोगी, धर्म और धन
दोनोंका मूल्यांकन करनेवाला, भारी जंघाओंवाला, कृतघ्न, पापरहित, राजाको मान्य, कामिनियोंको आनन्दित करनेवाला, दानी, जलसे भयभीत रहनेवाला और कठोर कार्य करने वाला परंतु अन्तमें विनम्र होता है।
जिस जातकका जन्म वृषराशिमें विद्यमान चन्द्र में
होता है, उसका फल इस प्रकार बताया गया है-
भोगी दाता शुचिर्दक्षो महासत्त्वो महाबलः।
धनी विलासी तेजस्वी सुमित्रश्च वृषे भवेत्॥
(मानसागरी १ । २६८)
अर्थात् वृष राशि स्थित चन्द्र में जन्म लेने वाला जातक
भोगी, दानी, पवित्र, कुशल, सत्त्वसम्पन्न, महान् बली, धनवान्, भोगविलास रत, तेजस्वी और अच्छे मित्रों वाला होता है।
जिस जातक का जन्म मिथुन राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
मिष्टवाक्यो लोलदृष्टिर्दयालु मैथुन प्रियः।
गान्धर्ववित्कण्ठरोगी कीर्तिभागी धनी गुणी॥
गौरो दीर्घः पटुर्वक्ता मेधावी च दृढव्रतः।
समर्थो न्यायवादी च जायते मिथुने नरः॥
(मानसागरी १ । २६९-२७०)
अर्थात् मिथुन राशि में जन्म लेने वाला जातक मृदुभाषी,
चंचलदृष्टि, दयालु, कामुक, संगीतप्रेमी, कण्ठरोगी,
यशस्वी, धनी, गुणवान्, गौरवर्ण एवं लम्बे शरीरवाला,
कार्यकुशल, वक्ता, बुद्धिमान्, दृढसंकल्प, सभी प्रकारसे
समर्थ और न्यायप्रिय होता है।
जिस जातक का जन्म कर्क राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
कार्यकारी धनी शूरो धर्मिष्ठो गुरुवत्सलः।
शिरोरोगी महाबुद्धिः कृशाङ्गः कृत्यवित्तमः॥
प्रवासशील कोपान्धोऽबलो दुःखी सुमित्रकः।
अनासक्तो गृहे वक्रः कर्कराशौ भवेन्नरः॥
(मानसागरी १ । २७१-२७२)
अर्थात् चन्द्रके कर्कराशि में होने पर जो जातक जन्म
लेता है, वह जातक कार्य करने वाला, धनवान्, शूर,
धार्मिक, गुरु का प्रिय, सिर से रोगी, अतीव बुद्धिमान्,
दुर्बल शरीर वाला, सभी कार्यों का ज्ञाता, प्रवासी, भयंकर
क्रोधी, निर्बल, दुःखी, अच्छे मित्रों वाला, गृह में अरुचि
रखने वाला तथा कुटिल होता है।
जिस जातक का जन्म सिंह राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
क्षमायुक्तः क्रियाशक्तो मद्यमांसरतः सदा।
देशभ्रमणशीलश्च शीतभीतः सुमित्रकः॥
विनयी शीघ्रकोपी च जननीपितृवल्लभः।
व्यसनी प्रकटो लोके सिंहराशौ भवेन्नरः॥
मानसागरी १।२७३-२७४)
अर्थात् सिंहराशि में चन्द्र के विद्यमान होने पर जातक
क्षमा शील, कार्य में समर्थ, मद्य-मांसमें सदैव आसक्त,
देश में भ्रमण करने वाला, शीत से भयभीत, अच्छे मित्रों वाला, विनयशील, शीघ्र क्रुद्ध होनेवाला, माता-पिताका प्रिय, व्यसनी (नशा आदि बुरे कार्योंमें अभ्यस्त) तथा संसारमें प्रख्यात होता है।
जिस जातक का जन्म कन्या राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
विलासी सुजनाह्लादी सुभगो धर्मपूरितः।
दाता दक्षः कविर्वृद्धो वेदमार्गपरायणः॥
सर्वलोकप्रियो नाट्यगान्धर्वव्यसने
प्रवासशीलः स्त्रीदुःखी कन्याजातो भवेन्नरः॥
(मानसागरी १ । २७५-२७६)
कन्याराशि में उत्पन्न व्यक्ति विलासी, सज्जनोंको
आनन्दित करने वाला, सुन्दर, धर्म से परिपूर्ण, दानी,
निपुण, कवि, वृद्ध, वैदिक मार्ग का अनुगामी, सभी
लोगों का प्रिय, नाटक, नृत्य और गीत की धुनमें आसक्त,
प्रवासी एवं स्त्री से दुःखी होता है।
जिस जातक का जन्म तुला राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
अस्थानरोषणो दुःखी मृदुभाषी कृपान्वितः।
चलाक्षश्चललक्ष्मीको गृहमध्येऽतिविक्रमः॥
वाणिज्यदक्षो देवानां पूजको मित्रवत्सलः।
प्रवासी सुहृदामिष्टस्तुलाजातो भवेन्नरः॥
(मानसागरी १ । २७७-२७८)
तुलाराशिमें उत्पन्न व्यक्ति अकारण क्रोध करनेवाला,
दुःखी, मधुरभाषी, दयालु, चंचल नेत्रों एवं अस्थिर
धनवाला, घरमें ही पराक्रम दिखानेवाला, व्यापारमें चतुर,
देवताओंका पूजन करनेवाला, मित्रोंके प्रति दयालु,
परदेशवासी तथा मित्रोंका प्रियपात्र होता है।
जिस जातक का जन्म वृश्चिक राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
बालप्रवासी क्रूरात्मा शूरः पिङ्गललोचनः।
परदाररतो मानी निष्ठुरः स्वजने भवेत्॥
साहसप्राप्तलक्ष्मीको जनन्यामपि दुष्टधीः।
धूर्तश्चौरकलारम्भी वृश्चिके जायते नरः॥
(मानसागरी १ । २७९-२८०)
वृश्चिक राशि में उत्पन्न व्यक्ति बाल्यावस्थासे ही
परदेशमें रहनेवाला, क्रूर स्वभाववाला, शूर, पीले नेत्रोंवाला, परस्त्रीमें आसक्त, अभिमानी, अपने भाई-बन्धुओंके प्रति निर्दयी, अपने साहस से धन प्राप्त करने वाला, अपनी माता के प्रति भी दुष्टबुद्धि वाला, धूर्तता और चोरी की कला का अभ्यास करने वाला होता है।
जिस जातक का जन्म धनु राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
शूरः सत्यधिया युक्तः सात्त्विको जननन्दनः।
शिल्पविज्ञानसम्पन्नो धनाढ्यो दिव्यभार्यकः॥
मानी चरित्रसम्पन्नो ललिताक्षरभाषकः।
तेजस्वी स्थूलदेहश्च धनुर्जातः कुलान्तकः॥
(मानसागरी १ । २८१-२८२)
यदि धनुराशि गत जन्म हो तो शूर, सत्य बुद्धि से युक्त,
सात्त्विक, मनुष्यों के हृदय को आनन्दित करने वाला, शिल्प (मूर्तिकला)-विज्ञानसे सम्पन्न, धनसे युक्त, सुन्दर स्त्रीवाला, अभिमानी, चरित्रवान्, सुन्दर शब्दों को बोलने वाला, तेजस्वी, मोटे शरीर वाला तथा कुल का नाशक होता है।
जिस जातक का जन्म मकर राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
कुले नष्टो वश स्त्रीणां पण्डितः परिवादकः।
गीतज्ञो ललिताग्राह्यो पुत्राढ्यो मातृवत्सलः॥
धनी त्यागी सुभृत्यश्च दयालुर्बहुबान्धवः।
परिचिन्तितसौख्यश्च मकरे जायते नरः॥
(मानसागरी १ । २८३-२८४)
मकरराशिमें जन्म लेनेवाला व्यक्ति अपने कुलमें
नष्ट (सबसे हीन अवस्थावाला), स्त्रियोंके वशीभूत,
विद्वान्, परनिन्दक, संगीतज्ञ, सुन्दर स्त्रियोंका प्रियपात्र,
पुत्रों से युक्त, माता का प्रिय, धनी, त्यागी, अच्छे नौकरोंवाला,दयालु, बहुत भाइयों (परिवार)-वाला तथा सुखके लिये अधिक चिन्तन करने वाला होता है।
जिस जातक का जन्म कुम्भ राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
दातालस: कृतज्ञश्च गजवाजिधनेश्वरः।
शुभदृष्टिः सदा सौम्यो धनविद्याकृतोद्यमः॥
पुण्याढ्यः स्नेहकीर्तिश्च धनभोगी स्वशक्तितः।
शालूरकुक्षिनिर्भीकः कुम्भे जातो भवेन्नरः॥
(मानसागरी १।२८५-२८६)
यदि कुम्भराशिमें जन्म हो तो मनुष्य दानी, आलसी,
कृतज्ञ, हाथी, घोड़ा और धन का स्वामी, शुभ दृष्टि एवं सदैव कोमल स्वभाव वाला, धन और विद्या हेतु प्रयत्नशील, पुत्र से युक्त, स्नेह युक्त, यशस्वी, अपनी शक्ति से धन का उपभोग करने वाला, मेढककी तरह उदरवाला तथा निर्भीक होता है ।
जिस जातक का जन्म मीन राशि में स्थित चन्द्र में होता है, उसका फल शास्त्रों में इस प्रकार बताया गया है।
गम्भीरचेष्टितः शूरः पटुवाक्यो नरोत्तमः।
कोपन कृपणो ज्ञानी गुणश्रेष्ठः कुलप्रियः॥
नित्यसेवी शीघ्रगामी गान्धर्वकुशलः शुभः।
मीनराशौ समुत्पन्नौ जायते बन्धुवत्सलः॥
(मानसागरी १।२८७-२८८)
जिसका जन्म मीन राशि में होता है, वह गम्भीर चेष्टा वाला, शक्तिशाली, बोलने में चतुर, मनुष्यों में श्रेष्ठ, क्रोधी, कृपण, ज्ञान सम्पन्न, श्रेष्ठ गुणों से युक्त, कुल में प्रिय, नित्य सेवाभाव रखने वाला, शीघ्रगामी, नृत्य- गीतादि में कुशल, शुभ दर्शन वाला तथा भाई बन्धुओं का प्रेमी होता है। जन्मकुंडली के पूर्ण विश्लेषण हेतु आप स्क्रीन पर दिए गए नम्बरों के माध्यम से सम्पर्क कर सकते हैं, वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन हेतु कामना करता है, नमस्कार।
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें