बुधवार, 1 जुलाई 2020

प्रदोष व्रत 2020

नमस्कार।
वैदिक एस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है।
वैदिक सनातन धर्म परम्परा में हमारे प्राचीन ऋषि महर्षियों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर मानवों के कष्टों को दूर करने हेतु अनेकों व्रतों का उल्लेख किया है। जिनका अनुसरण करने मात्र से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर तो होते ही हैं, साथ ही साथ मनोकामना भी पूरी होती है।
कुछ ऐसे विशेष व्रत हैं जिनके करने मात्र से व्यक्ति अपनी विशेष मनोकामनाएं पूरी कर सकता है, उन्ही में से एक प्रमुख व्रत है प्रदोष व्रत।
प्रदोष-व्रत का सनातन धर्म में अति-महत्त्वपूर्ण स्थान है। माना जाता है कि प्रदोष-व्रत आशुतोष भगवान शिव की प्रसन्नता व आशीर्वाद को प्राप्त करने का सर्वश्रेष्ठ साधन है।
भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, आशुतोष शब्द का शाब्दिक अर्थ है शीघ्र प्रसन्न होने वाले।अतः प्रदोष-व्रत को श्रद्धा व भक्तिपूर्वक धारण करने मात्र से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
2 जुलाई 2020 को गुरुप्रदोष है। अतः समस्त भगवद्भक्तों द्वारा इसी दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रदोष व्रत धारण किया जाता है। प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष एवं कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह व्रत धारण करने का विधान है
गुरुवार के दिन होने के कारण इस प्रदोष को गुरु-प्रदोष कहा जाता है। गुरु प्रदोष व्रत विशेषकर स्त्रियों के लिए होता है। गुरु प्रदोष व्रत धारण करने से दांपत्य सुख, पति सुख व सौभाग्य प्राप्ति एवं सन्तान सुख की प्राप्ति होती है।
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पुराणों में प्रदोष व्रत की महिमा को मुक्तकंठ गाया गया है।
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत को रखने से सवत्सा गौ दान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जब चारों ओर कलियुग के प्रभाव से समस्त जनमानस के जीवन में मनसा वाचा कर्मणा जानकर या अनजाने में अधर्म की ही स्थिति व्याप्त है, अन्याय और अनाचार का एकाधिकार है, मनुष्य परोपकार का त्याग कर स्वार्थ भाव में ही रत है, व्यक्ति सत्कर्म करने के स्थान पर नीच कार्यों को ही कण लोभ से अधिक महत्व दे रहा है, ऐसे समय में जो सनातन धर्म मार्गी व्यक्ति त्रयोदशी का व्रत रखकर, शिव आराधना करेगा, उस पर अवश्य ही शिव कृपा होगी।
इस व्रत को रखने वाला व्यक्ति जीवन पर्यन्त पारिवारिक, आर्थिक, सामाजिक, सुदृढ़ता के साथ जीवन यापन कर अंत समय में जन्म- जन्मान्तर के कर्म बन्धन से मुक्त हो, चौरासी के चक्रव्यूह को तोड़कर मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ता है, और उसे भगवान शिव के उत्तम लोक की प्राप्ति सहज ही हो जाती है।
ऐसे इस दिव्य प्रदोष व्रत की पूर्ण विधि जानने हेतु आप हमारे वैदिक एस्ट्रो केयर चैनल को सब्सक्राइब कर नए नोटिफिकेशन की जानकारी हेतु वैल आयकन दबाकर ऑल सेलेक्ट अवश्य करें।

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उत्तम फल की प्राप्ति हेतु किसी भी धार्मिक कर्म को करने के लिए पुराणों में कुछ विशेष नियम निर्धारित किए गए हैं। जिन्हें नित्य एवं नैमित्तिक दो भागों में विभाजित किया गया है। इनका अनुपालन कार्य की सफलता के लिए परम आवश्यक होता है।
अतः प्रदोष व्रत धारण करने के लिए व्रती को चाहिए कि वह त्रयोदशी तिथि को प्रातः सूर्योदय से पूर्व जागकर यह प्रक्रिया पूरी कर शय्या का त्याग करे।
सर्वप्रथम अपनी हथेलियों के दर्शन करे और साथ में इस श्लोक का उच्चारण करे।
कराग्रे वसते लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती।
करमूले तु गोविंद, प्रभाते कर दर्शनम।।
उसके बाद भूमि को यह श्लोक कहते हुए प्रणाम करे।
समुद्र वसने देवी पर्वतस्तन मण्डले।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शम क्षमस्व मे।।
उसके बाद शौच मंजन स्नानादि नित्यकर्मों से निवृत होकर, भगवान सूर्य नारायण को तांबे के लोटे में शुध्द जल भरकर धर्म अर्थ काम मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की कामना करते हुए चार बार अर्घ्य प्रदान करे।
फिर आशुतोष भगवान श्री भोले नाथ का हाथ जोड़कर मन को एकाग्र कर स्मरण करें।
व्रत का संकल्प लें, और भगवान शिव की विधिवत पूजा अर्चना करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। धूप दीप प्रज्वलित कर पुष्प, पुष्पमाला अर्पित करें। फिर भाव से भोग लगाकर भगवान की आरती उतारें।
फिर पूरे दिन उपावस रखने के बाद सूर्यास्त से एक घंटा पहले, स्नान आदि कर श्वेत वस्त्र धारण करें।
पूजन स्थल को गंगाजल या स्वच्छ जल से शुद्ध करने के बाद, गाय के गोबर से लीपकर, मंडप तैयार करें।
अब इस मंडप में पांच रंगों का उपयोग करते हुए अष्टदल बनाएं। अष्टदल पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
कुशा के आसन पर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठे और भगवान शंकर का पुनः विधिवत पूजन करें।
पूजन के उपरांत शिव पंचाक्षर मन्त्र का ॐ कार के साथ, ॐ नमः शिवाय का यथा शक्ति जाप अवश्य करें। पश्चात भगवान की आरती कर भोग लगाएं। सभी को प्रसाद वितरित कर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें।
इस प्रकार नियम पूर्वक प्रदोष व्रत धारण करने से भक्त की मनोकामना भगवान अवश्य पूरी करते हैं।
विशेष कामना के अनुसार आप विधि पूर्वक प्रदोष व्रत धारण कर सकते हैं।
आयु वृद्धि तथा अच्छे स्वास्थ्य लाभ के लिए रविवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को धारण करें।
सोमवार के दिन त्रयोदशी पड़ने पर किया जाने वाला व्रत आरोग्य प्रदान करता है और इंसान की सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।
मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत हो तो उस दिन के व्रत को करने से रोगों से मुक्ति व स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है.
बुधवार को प्रदोष व्रत हो तो, उपासक की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इस दिन के व्रत के फल से शत्रुओं का विनाश होता है।
शुक्रवार के दिन होने वाला प्रदोष व्रत सौभाग्य और दाम्पत्य जीवन की सुख-शान्ति के लिए धारण किया जाता है
संतान प्राप्ति की कामना हो तो शनिवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत धारण करना चाहिए।

भगवान आशुतोष आपकी भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो, आपकी प्रत्येक मनोकामना पूरी करें। इस दिव्य मनोकामना के साथ साथ वैदिक एस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन हेतु कामना करता है नमस्कार।

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Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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