सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का विशेष महत्व है, इस दिन मौन रहकर व्रत किया जाता है और स्नान कर दान-पूण्य करने का विधान है, शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन अपने पितरों को याद करके दान-पुण्य करने से पूर्वजों को मोक्ष पद की प्राप्ति होती है। वहीं यदि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा मन का मुख्य कारक ग्रह है, अमावस्या के दिन चन्द्रमा के पृथ्वी से न् दिखाई देने के कारण पड़ने वाले प्रभाव से समस्त प्राणियों का मन अशांत एवं व्यथित होता है, अतः मानसिक स्थिति को दृढ़ता प्रदान करने हेतु अमावस्या तिथि को गंगादि पवित्र नदियों में स्नान, व्रत दान तर्पण आदि का विशेष महत्व होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, और इस दिन कुछ कर्म विशेष करने मात्र से पुण्य प्राप्ति के साथ साथ पितृदोष ग्रहबाधा आदि से भी मुक्ति मिलती है। आज हम मौनी अमावस्या के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, अतः आप वीडियो को अंत तक अवश्य देखें एवं वैदिक ऐस्ट्रो केयर चैनल को सब्सक्राइब कर नए नोटिफिकेशन की जानकारी के लिए वैल आइकन दबाकर ऑल सेलेक्ट अवश्य करें।
सर्वप्रथम तो मौनी अमावस्या पर गङ्गा यमुना नर्मदा आदि किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान अवश्य करना चाहिए। इस दिन तीर्थ जल में स्नान मात्र से व्यक्ति पाप रहित हो जाता है। किंतु यदि मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान करना संभव ना हो तो नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान अवश्य करें। स्नान के उपरांत भगवान सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। तथा अपने पितरों के निमित्त इस दिन विधिवत तर्पण कर यथा शक्ति ब्राह्मण भोजन एवं वस्त्र अन्न आदि का दान भी करना चाहिए। मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत धारण किया जाता है। अतः अपनी इच्छा अनुसार मौनी अमावस्या के दिन पूरे दिन, या पूजन तर्पण दान आदि सम्पन्न करने तक मौन धारण करना चाहिए। कुछ साधु सन्यासियों द्वारा इसी दिन से संकल्प लेकर एक माह, एक वर्ष या बारह वर्ष तक अखण्ड मौन धारण किया जाता है। मान्यता है कि बारह वर्ष तक अखण्ड मौन व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को वाकसिद्धि प्राप्त होती है। जो लोग इस दिन मौन धारण नहीं कर सकते उन्हें यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी के भी साथ इस दिन वाद विवाद ना करें, असत्य न् बोलें, और कटु वचनों का प्रयोग न् करें। यदि पितृदोष के कारण आपके कार्य बार बार बाधित होते हैं, कार्यों में अड़चनें आती हैं तो मौनी अमावस्या के दिन आपको तेल, तिल, सूखी लकड़ी, ऊनी कम्बल, गर्म कपड़े, काले कपड़े, जूते आदि का दान करना चाहिए।
मौनी अमावस्या के दिन गौ दान, स्वर्ण दान और भूमि दान का विशेष महत्व है। यदि जातक अपनी सामर्थ्य अनुसार इन सभी वस्तुओं का दान करता है, तो उसका सम्पूर्ण कुल पितृदोष से मुक्त हो जाता है, और उसके सभी रुके हुए कार्य भी पूर्ण हो जाते हैं।
यदि किसी भी व्यक्ति की जन्मपत्रिका में किसी भी तरह का कोई ग्रह दोष उपस्थित हो तो मौनी अमावस्या के दिन किसी वैदिक कर्मकाण्डी ब्राह्मण द्वारा शिवालय में जाकर वैदिक विधि से गणेशादि पञ्चाङ्ग पूजन करने के उपरांत एक चौकी पर विधिवत नवग्रहों की स्थापना कर षोडशोपचार से ग्रह पूजन करवाना चाहिए। ग्रह पूजन के उपरांत दुग्ध मिश्रित जल से रुद्राभिषेक भी करना चाहिए। अभिषेक के उपरांत नवग्रहों के निमित्त नौ प्रकार की दाल, नौ रंग के कपड़े, दक्षिणा सहित दान करना चाहिए। इस दिन सन्ध्या समय पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर पीपल वृक्ष की 21, 51, या 108 परिक्रमा करनी चाहिए। यह कर्म करने मात्र से व्यक्ति के जीवन में उपस्थित सभी ग्रह जनित बाधाएं दूर होती हैं। एवं साथ ही व्यक्ति अपने लक्ष्यों को सहजता से प्राप्त कर लेता है। वैदिक ऐस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन हेतु कामना करता है, नमस्कार
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