शनिवार, 17 जनवरी 2026

गण्डमूल नक्षत्र क्या हैं? – ज्येष्ठा, मूल और रेवती सहित सम्पूर्ण जानकारी


गण्डमूल नक्षत्र क्या होते हैं? जानिए गण्डमूल नक्षत्रों का प्रभाव, दोष और शान्ति उपाय
(वैदिक ज्योतिष के अनुसार सम्पूर्ण जानकारी)

भूमिका
नमस्कार।
वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार भचक्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं। इन 27 नक्षत्रों में कुछ नक्षत्र अत्यंत संवेदनशील एवं विशेष फल देने वाले माने जाते हैं, जिन्हें गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है। इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातकों को लेकर समाज में कई भ्रांतियाँ प्रचलित हैं, जबकि शास्त्रों में इनके विषय में विस्तृत और स्पष्ट वर्णन मिलता है।
इस ब्लॉग में हम गण्डमूल नक्षत्रों का शास्त्रीय परिचय, उनके प्रभाव, चरणानुसार फल, भ्रांतियाँ तथा शान्ति उपाय विस्तार से समझेंगे।
गण्डमूल नक्षत्र क्या होते हैं?
जब केतु के नक्षत्र का अंत होकर बुध के नक्षत्र का आरम्भ होता है और यह स्थिति राशि संधि पर पड़ती है, तब उस नक्षत्र को गण्डमूल नक्षत्र कहा जाता है।
गण्डमूल नक्षत्रों की संख्या
कुल 6 गण्डमूल नक्षत्र माने गए हैं—
अश्विनी
आश्लेषा
मघा
ज्येष्ठा
मूल
रेवती
इन नक्षत्रों का उल्लेख स्कन्द पुराण, नारद पुराण, जातक पारिजात, बृहत् पराशर होरा शास्त्र, जातकाभरणम् जैसे अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
गण्डांत और अभुक्त मूल क्या है?
रेवती नक्षत्र की अंतिम चार घड़ियाँ और
अश्विनी नक्षत्र की पहली चार घड़ियाँ
को गण्डांत काल कहा जाता है।
विशेष रूप से ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र के मध्य का एक प्रहर अत्यंत अशुभ माना गया है।
अभुक्त मूल नक्षत्र—
ज्येष्ठा की अंतिम 2 घड़ियाँ
मूल की पहली 2 घड़ियाँ
(कुल 4 घड़ियाँ)
इनमें जन्म अत्यंत संवेदनशील माना गया है।
गण्डमूल नक्षत्रों से जुड़ी भ्रांतियाँ
अधिकांश लोग यह मानते हैं कि गण्डमूल नक्षत्र में जन्मा बच्चा पिता के लिए अनिष्टकारी होता है, जो पूर्णतः सत्य नहीं है।
👉 सत्य यह है कि
गण्डमूल नक्षत्रों के चारों चरणों का फल अलग-अलग होता है
कुछ चरण शुभ भी होते हैं
विधिवत नक्षत्र शान्ति से दोष समाप्त हो जाता है
1. अश्विनी नक्षत्र (मेष राशि – केतु)
इस नक्षत्र में जन्मा जातक प्रायः संघर्षशील होता है।
चरण
फल
प्रथम
पिता के लिए कष्टकारी
द्वितीय
फिजूलखर्ची
तृतीय
भ्रमणशील स्वभाव
चतुर्थ
शरीर से संबंधित कष्ट
2. आश्लेषा नक्षत्र (कर्क राशि – बुध)
जातक चतुर, बुद्धिमान एवं परिवर्तनशील होता है।
चरण
फल
प्रथम
कोई विशेष दोष नहीं
द्वितीय
पैतृक धन हानि
तृतीय
माता-पिता के लिए कष्ट
चतुर्थ
पिता के लिए अनिष्ट
शास्त्र वचन:
आश्लेषाद्ये न गण्डं स्यात्…
3. मघा नक्षत्र (सिंह राशि – केतु)
स्पष्टवादी, उद्यमी एवं धनवान जातक।
चरण
फल
प्रथम
माता-पिता या मातृ पक्ष को कष्ट
द्वितीय
पिता को परेशानी
तृतीय
शुभ फल
चतुर्थ
विद्या व धन में वृद्धि
4. ज्येष्ठा नक्षत्र (वृश्चिक राशि – बुध)
तीक्ष्ण बुद्धि, धर्मपरायण किन्तु संघर्षयुक्त जीवन।
चरण
फल
प्रथम
बड़े भाई-बहनों के लिए कष्ट
द्वितीय
छोटे भाई के लिए अनिष्ट
तृतीय
पिता के लिए कष्ट
चतुर्थ
स्वयं व पिता के लिए अनिष्ट
⚠️ मंगलवार के योग में जन्मी कन्या बड़े भाई के लिए अरिष्टकारी मानी जाती है।
5. मूल नक्षत्र (धनु राशि – केतु)
धार्मिक, उदार, परोपकारी स्वभाव।
चरण
फल
प्रथम
पिता को कष्ट
द्वितीय
माता को कष्ट
तृतीय
धन हानि
चतुर्थ
शुभ फल
👉 रविवार के योग में जन्मी कन्या श्वसुर के लिए अनिष्टकारी मानी जाती है।
मूल नक्षत्र का सूक्ष्म विश्लेषण
मूल नक्षत्र की कुल घटियों को 15 भागों में बाँटकर फल बताया गया है—
पिता, चाचा, बहनोई, दादा, पशु, नौकर, स्वयं जातक आदि पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।
6. रेवती नक्षत्र (मीन राशि – बुध)
सर्वप्रिय, धनवान, विद्वान जातक।
चरण
फल
प्रथम
राजा समान वैभव
द्वितीय
मंत्री समान सुख
तृतीय
धन वृद्धि
चतुर्थ
माता-पिता के लिए कष्ट
गण्डमूल नक्षत्र शान्ति का महत्व
👉 यह ध्यान देने योग्य है कि
विधिवत गण्डमूल नक्षत्र शान्ति कराने से
सभी प्रकार के अनिष्ट फल समाप्त हो जाते हैं
जातक का जीवन सुख-समृद्धि से युक्त होता है
निष्कर्ष
गण्डमूल नक्षत्र कोई अभिशाप नहीं है।
शास्त्रों में इनके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्ष स्पष्ट रूप से बताए गए हैं।
सही जानकारी, सूक्ष्म विश्लेषण और वैदिक विधि से की गई शान्ति से
👉 गण्डमूल दोष पूर्णतः शांत हो जाता है।
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वैदिक ऐस्ट्रो केयर
आपके मंगलमय जीवन की कामना करता है।
🙏 नमस्कार 🙏

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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