रविवार, 18 जनवरी 2026

अस्त ग्रह क्या होते हैं? कुंडली में उनके गंभीर प्रभाव और वैदिक उपाय

वैदिक ज्योतिष में अस्त ग्रह: अर्थ, प्रभाव, दोष और शांति उपाय


भूमिका
नमस्कार। वैदिक ऐस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है।
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की स्थिति का अत्यंत गूढ़ और विस्तृत वर्णन मिलता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण विषय है — अस्त ग्रह। ग्रहों के अस्त होने से जातक के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
शास्त्रों में कहा गया है —
“त्रीभि अस्तै भवे जडवत्”
अर्थात यदि किसी जन्मपत्रिका में तीन ग्रह अस्त हो जाएँ, तो व्यक्ति जड़वत हो जाता है।
यहाँ जड़ का अर्थ है —
शारीरिक, मानसिक और वाणी की निष्क्रियता, आलस्य, उत्साह की कमी तथा जीवन में स्थिरता की चाह। ऐसा व्यक्ति कर्म करने की इच्छा खो बैठता है।
अस्त ग्रह क्या होते हैं?
जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाता है, तो वह सूर्य की तीव्र ऊर्जा के कारण अपने स्वाभाविक गुणों को प्रकट नहीं कर पाता। इस अवस्था को ही अस्त अवस्था कहा जाता है।
अस्त ग्रह:
अपने नैसर्गिक बल को खो देता है
शुभ होते हुए भी शुभ फल देने में असमर्थ हो जाता है
उच्च या मूल त्रिकोण राशि में भी कमजोर परिणाम देता है
शास्त्रों में अस्त ग्रह की तुलना बीमार और अशक्त राजा से की गई है।
यदि अस्त ग्रह—
नीच राशि में हो
दु:स्थान (6, 8, 12) में हो
शत्रु राशि या पाप ग्रहों के प्रभाव में हो
तो वह “कोढ़ में खाज” के समान अत्यंत अशुभ फल देने लगता है।
कुंडली विश्लेषण में अस्त ग्रह का महत्व
किसी भी जन्मकुंडली का फलित करते समय अस्त ग्रह का विश्लेषण अनिवार्य होता है।
अस्त ग्रह की महादशा या अंतर्दशा में—
गंभीर दुर्घटनाएँ
रोग, शल्यक्रिया
मानसिक पीड़ा
धन हानि
पारिवारिक संकट
अवश्य देखने को मिलते हैं।
यदि कोई शुभ ग्रह (गुरु, शुक्र, चन्द्र, बुध) अस्त हो जाए, तो परिणाम और भी अधिक गंभीर हो जाते हैं। कई बार एक ही शुभ ग्रह के पूर्ण अस्त होने से व्यक्ति का संपूर्ण जीवन अभावग्रस्त हो जाता है।
अस्त ग्रह और विवाह में विलंब
यदि विवाह का कारक ग्रह अस्त हो तथा नवांश लग्नेश भी अस्त हो, तो व्यक्ति—
अमीर हो या गरीब
सुंदर हो या सामान्य
फिर भी विवाह में अत्यधिक विलंब करता है।
दशा आने पर यौवन काल में भी विवाह टल जाता है, जिससे—
दांपत्य सुख
संतान सुख
प्रभावित हो जाते हैं।
ग्रहों के अस्त होने की अंश सीमा
चन्द्रमा – सूर्य से 12°
मंगल – सूर्य से 17°
बुध – 13° (वक्री में 12°)
गुरु – 11°
शुक्र – 9° (वक्री में 8°)
शनि – 15°
अस्त ग्रहों को बल कैसे दें?
1️⃣ शुभ फलदायी अस्त ग्रह
यदि ग्रह शुभ है, पर अस्त है, तो—
वैदिक मंत्र जप
दान
औषधि स्नान
ग्रह शांति पूजा
द्वारा उसे अतिरिक्त बल दिया जा सकता है।
2️⃣ अशुभ फलदायी अस्त ग्रह
यदि ग्रह स्वभाव से अशुभ है— ❌ उसका रत्न धारण वर्जित है
✅ उसके बीज मंत्र या वैदिक मंत्र का जप
✅ ब्राह्मणों द्वारा संकल्प सहित पूजा
से ग्रह शांत होता है और उसका स्वभाव धीरे-धीरे शुभ होने लगता है।
ग्रह अनुसार अस्त दोष और उपाय
🌙 अस्त चन्द्रमा
दोष
मानसिक रोग, अवसाद
माता का कष्ट
स्त्री सुख की कमी
मिर्गी, नशा
उपाय
महिलाओं का सम्मान
चांदी धारण
शिव उपासना
🔥 अस्त मंगल
दोष
नसों का दर्द
रक्त विकार
विवाद, मुकदमे
आत्मविश्वास की कमी
उपाय
जमीन पर या लो-फ्लोर पलंग पर सोएँ
तांबा धारण
हनुमान जी की उपासना
🌿 अस्त बुध
दोष
निर्णय क्षमता कमजोर
भ्रम, तनाव
चर्म रोग
धोखा
उपाय
गायत्री मंत्र जप
सादा हरा भोजन
गणेश या दुर्गा उपासना
📿 अस्त बृहस्पति
दोष
संतान बाधा
मधुमेह
विवाह में कठिनाई
अनैतिक संबंध
उपाय
सूर्य को हल्दी मिला जल
स्वर्ण धारण
बुजुर्गों की सेवा
🌸 अस्त शुक्र
दोष
दांपत्य सुख का अभाव
किडनी रोग
नशे की लत
प्रतिष्ठा हानि
उपाय
दही का सेवन
हल्की सुगंध
माँ लक्ष्मी की उपासना
अस्त शनि
दोष
बेरोजगारी
संघर्ष
दरिद्रता
रीढ़ व जोड़ों का दर्द
उपाय
शनिवार पीपल के नीचे दीपक
लोहे की अंगूठी
वृद्ध व निर्धनों की सेवा
निष्कर्ष
यदि कुंडली में कोई ग्रह अस्त और अशुभ हो, तो उसके मंत्र जप द्वारा ही उसके दुष्प्रभाव कम किए जा सकते हैं। सही विधि से किए गए उपाय ग्रह को शांत कर जीवन में संतुलन लाते हैं।
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🙏 नमस्कार 🙏

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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