रविवार, 25 जनवरी 2026

राहु ग्रह: जन्मकुंडली में राहु के प्रभाव, अशुभ परिणाम और उपाय | वैदिक ज्योतिष


राहु ग्रह: जन्मकुंडली में राहु के प्रभाव और उपाय
नमस्कार, वैदिक एस्ट्रो केयर में आपका हार्दिक अभिनंदन है।
ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को मायावी ग्रह कहा गया है। आम जनमानस में सर्वाधिक भय शनि देव के उपरांत राहु ग्रह के प्रति होता है। शनिदेव न्याय के आधार पर फल प्रदान करते हैं, जबकि राहु एक मायावी छाया ग्रह है। यह ग्रह व्यक्ति की जन्मकुंडली में अशुभ अवस्था में होने पर व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक और मानसिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डालता है।
इस आर्टिकल में हम राहु के प्रभाव और उपायों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
राहु के अशुभ प्रभाव
किसी जातक की जन्मपत्रिका में राहु ग्रह की अशुभ स्थिति जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित करती है। राहु के प्रभाव में जातक विद्यार्थी हो या व्यवसायी, विवाहित या अविवाहित, हर क्षेत्र में कई समस्याओं का सामना करता है। 
प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं:
आजीविका में बाधा: नौकरी या व्यवसाय में असफलता, योग्य होने पर भी परिणाम न मिलना।
मानसिक तनाव: नकारात्मक विचार, नींद की कमी, सपनों का लगातार आना।
धन हानि: अनियोजित खर्च, सीमित आय, अनैतिक कामों में फँसना।
संबंधों में समस्या: वैवाहिक तनाव, पति-पत्नी और अन्य रिश्तों में विवाद।
शारीरिक रोग: पेट, आंत और अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ।
कानूनी और सामाजिक परेशानी: पुलिस और न्यायालय से जुड़ी दिक्कतें।
गुप्त विद्याओं की ओर झुकाव: गलत मार्ग पर चलना, ब्लैक मैजिक या टोना-टोटका में समय व धन व्यय।
यदि राहु की महादशा जीवन की प्रारंभिक अवस्था में हो, तो यौन रोग और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
राहु का व्यवहार और युति
राहु की अपनी कोई राशि नहीं होती। यह जिस ग्रह के साथ भी युति करता है:
उस ग्रह की शक्ति को समाप्त कर देता है।
उस भाव से संबंधित फल प्रदान करने लगता है।
राहु अन्य ग्रहों के साथ युति बनाकर विभिन्न योग बनाता है:
सूर्यग्रहण योग (सूर्य के साथ) – पितृदोष का संकेत।
चंद्रग्रहण योग (चंद्रमा के साथ) – चिंता योग।
अंगारक योग (मंगल के साथ)।
राहु मित्र और शत्रु राशियों के अनुसार:
मित्र राशियाँ: मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
शत्रु राशियाँ: कर्क, सिंह
राहु ग्रह शुक्र के साथ राजस, सूर्य एवं चंद्र के साथ शत्रुता करता है।
जन्मकुंडली में राहु की स्थिति प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ, सप्तम, नवम, दशम और एकादश भाव में अशुभ मानी जाती है।
राहु ग्रह से मुक्ति और उपाय
राहु के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन हमेशा जन्मकुंडली का विश्लेषण करवाकर ही उपाय करें:
मंत्र जप – विशेष मंत्रों का नियमित उच्चारण।
औषधि स्नान – वैदिक पद्धति के अनुसार।
दान – तिल, धातु, वस्त्र, या जरूरतमंदों को।
हवन – राहु शांति के लिए यज्ञ या हवन।
नोट: बिना कुंडली देखे उपाय करना हानिकारक हो सकता है। कई बार साधारण उपाय और टोने-टोटके राहु की अशुभ स्थिति को बढ़ा देते हैं।
राहु के शुभ होने पर व्यक्ति को कीर्ति, सम्मान, राज वैभव और बौद्धिक उपलब्धि प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
राहु ग्रह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में चुनौती प्रस्तुत करता है। किन्तु सही समय पर वैदिक उपाय और जन्मकुंडली के अनुसार शांति उपाय करने से राहु शुभ फल भी प्रदान करता है।
यदि आप अपने जीवन में राहु के प्रभाव का अनुभव कर रहे हैं या उपरोक्त समस्याओं से प्रभावित हैं, तो जन्मकुंडली का पूर्ण विश्लेषण करवाएँ और योग्य वैदिक ज्योतिषी से राहु शांति उपाय कराएँ।
वैदिक एस्ट्रो केयर आपके मंगलमय जीवन की कामना करता है।
 नमस्कार

Vedic Astro Care

Author & Editor

आचार्य हिमांशु ढौंडियाल

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